ताराबोगा में संत अन्ना धर्म समाज की संरक्षिका का पर्व धूमधाम से मनाया गया
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा, ठेठईटांगर : संत अन्ना धर्म समाज की संरक्षिका के सम्मान में 26 जुलाई को ताराबोगा में संत अन्ना धर्म बहनों द्वारा एक भव्य पर्व का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9:30 बजे मिस्सा पूजा के साथ हुई, जिसके मुख्य अनुष्ठाता फादर अभय तिग्गा थे। उनके साथ सहायक अनुष्ठाता फादर गैब्रियल डुंगडुंग, फादर यूजीन टोप्पो और फादर पैट्रिक बारला ने भी पूजा संपन्न की।
सिस्टर सुपरियर सी. पुष्पीका केरकेट्टा ने अपने संबोधन में बताया कि संत अन्ना धर्म समाज की स्थापना 26 जुलाई 1897 को स्व. सिस्टर मेरी बर्नादेत द्वारा की गई थी। इस वर्ष समाज अपनी 129वीं वर्षगांठ मना रहा है। वर्तमान में विश्वभर में 1897 संत अन्ना धर्म बहनें शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित हैं।
इस अवसर पर झामुमो जिला अध्यक्ष अनिल कांडुलना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सिस्टर पुष्पीका केरकेट्टा, सिस्टर पुष्पा खेस, सिस्टर प्रोमिला बिलुंग, सिस्टर एंजेला हीरो, सिस्टर वर्नादत्त तिग्गा, सिस्टर संध्या कुजूर और सिस्टर अर्चना कुजूर को पुष्प गुच्छ भेंट कर संत अन्ना पर्व की शुभकामनाएं दीं। अपने उद्गार में कांडुलना ने कहा, “संत अन्ना और जोअकिम आदर्श माता-पिता थे, जिन्होंने अपनी पुत्री मरियम का पालन-पोषण श्रद्धा और प्रेम के साथ किया। हमें उनकी जीवनी से प्रेरणा लेकर समाज के दबे-कुचले और असहाय लोगों की सेवा करनी चाहिए।”
सिस्टर पुष्पा खेस ने अपने संबोधन में कहा, “संत अन्ना धर्म बहनें विश्वभर में निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं। संत अन्ना धर्म समाज की संरक्षिका माता बर्नादेत ने इसे विश्व स्तर पर एकजुट किया। उनकी स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।”
कार्यक्रम में संत अन्ना विद्यालय, ताराबोगा के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रोमन कैथोलिक कलीसिया द्वारा 26 जुलाई को विश्वभर में संत अन्ना और संत जोअकिम का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
इस अवसर पर झामुमो केन्द्रीय समिति सदस्य नोवस केरकेट्टा, जिला कोषाध्यक्ष राजेश टोप्पो, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, महिला संघ, कैथोलिक सभा, युवा संघ और हजारों की संख्या में माता-पिता, भाई-बहनें उपस्थित थे।

















