रांची में आरएसएस का जनजातीय संवाद: संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले — “जिस दिन जनजाति समाप्त हो जाएगा, सनातन समाप्त हो जाएगा”
रांची में आरएसएस का जनजातीय संवाद: संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले — “जिस दिन जनजाति समाप्त हो जाएगा, सनातन समाप्त हो जाएगा”
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रांची, 24 जनवरी — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आज झारखंड की राजधानी रांची में एक महत्वपूर्ण जनजातीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष (Centenary Year) की श्रृंखला में शामिल था, जिसमें जनजातीय समाज की समस्याओं, चुनौतियों और सांस्कृतिक पहचान पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने व्यक्तिगत रूप से दोनों सत्रों में भाग लिया और जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद किया।कार्यक्रम कार्निवल बैंक्वेट हॉल सुबह 10:30 बजे से शुरू हुआ और शाम तक चला।
इसमें बिहार-झारखंड के विभिन्न जिलों से लगभग एक हजार जनजातीय समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह एक बंद कमरे की बैठक थी, जहां खुले मन से विचार-विमर्श हुआ।
पहले सत्र में उठे प्रमुख मुद्दे
सुबह के सत्र में प्रतिभागियों ने जनजातीय समाज से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्य विषय थे:
धर्म परिवर्तन (Conversion) और इसके प्रभाव
बाहरी घुसपैठ (Infiltration) से भूमि और संस्कृति पर खतरा
डी-लिस्टिंग (Scheduled Tribes की सूची से हटाने की आशंका)
आरक्षण की सुरक्षा और जनजातीय हित
पेसा कानून (PESA Act) की कमियां और क्रियान्वयन में खामियां
भूमि विवाद और विस्थापन की समस्या
दूसरे सत्र में मोहन भागवत के महत्वपूर्ण बयान
दोपहर 2 बजे से शुरू हुए दूसरे सत्र में डॉ. मोहन भागवत ने जनजातीय समाज की समस्याओं पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा:“सनातन का मूल जनजाति समाज है। जिस दिन जनजाति समाप्त हो जाएगा, सनातन समाप्त हो जाएगा।”
यह बयान कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा रहा। भागवत ने जोर दिया कि जनजातीय समाज और सनातन धर्म एक-दूसरे से अविभाज्य हैं। उन्होंने धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए समाज को स्वयं आगे आने और संगठित होने की अपील की। साथ ही, उन्होंने विविधता में एकता को भारत का मूल धर्म बताते हुए कहा कि चुनौतियों का मुकाबला सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
प्रमुख अतिथि और उपस्थितिकार्यक्रम में झारखंड के कई वरिष्ठ जनजातीय नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा
चंपाई सोरेन
मधु कोड़ा
सीता सोरेन
गीता कोड़ा
समीर उरांव
शिवशंकर उरांव
और अन्य कई जनजातीय समाज के प्रतिनिधि।राजनीतिक प्रतिक्रियाएंकार्यक्रम के बाद झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने इसे पाखंड करार देते हुए आलोचना की। उन्होंने कहा कि आरएसएस का यह संवाद आदिवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

















