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आईआईटी ISM धनबाद की प्रो. मधुलिका गुप्ता को रॉयल सोसाइटी का अंतरराष्ट्रीय सम्मान: महिला दिवस पर स्वच्छ ऊर्जा में मिला सम्मान ..

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इंटरनेशनल वूमेन्स डे 2026 पर रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (आरएससी) ने अपने प्रतिष्ठित ‘मटेरियल्स पोर्टफोलियो जर्नल्स’ के विशेष संग्रह में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मधुलिका गुप्ता को स्थान देकर सम्मानित किया है। यह संग्रह 2025 में महिला वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाले उन चुनिंदा शोधों को समर्पित है, जिन्होंने वैश्विक विज्ञान जगत में क्रांतिकारी योगदान दिया।

स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक शोध

प्रो. गुप्ता को यह प्रतिष्ठा उनके शोध पत्र “इन सिलिकॉन डिज़ाइन एंड एक्सपेरिमेंटल वेलिडेशन ऑफ़ ए हाई एंट्रोपी Perovskite ऑक्साइड for सोफ्क कैथोड़ीस” (“In Silico Design and Experimental Validation of a High-Entropy Perovskite Oxide for SOFC Cathodes”)के लिए मिली, जो 2025 में जर्नल ऑफ मटेरियल्स केमिस्ट्री A में प्रकाशित हुआ। इस शोध में सह-लेखक जे. काला, वी. धोंगड़े, एस. घोष, एस. बसु, बी. कुमार और एम. ए. हैदर शामिल रहे। शोध सॉलिड ऑक्साइड फ्यूल सेल (SOFC) के कैथोड के लिए हाई-एंट्रॉपी पेरोव्स्काइट ऑक्साइड सामग्री के कम्प्यूटेशनल डिजाइन और प्रयोगिक सत्यापन पर केंद्रित है, जो हाइड्रोजन से बिजली उत्पादन की कुशलता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

कोयला-निर्भर भारत के लिए उम्मीद की किरण

भारत जैसे कोयला-आधारित बिजली उत्पादन वाले देश में प्रो. गुप्ता का यह शोध विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वे हाइड्रोजन को सीधे बिजली में बदलने वाली तकनीकों पर कार्यरत हैं, जो अभी प्रारंभिक चरण में हैं। “यह शोध की संभावनाएं अपार हैं। रिसर्च पूरी होने पर ही इसकी व्यावसायिक सफलता स्पष्ट होगी, लेकिन स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य के लिए यह दिशा-निर्धारक है,” प्रो. गुप्ता ने कहा।

प्रो. गुप्ता: विज्ञान और नेतृत्व की मिसाल

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में जून 2021 से कार्यरत प्रो. गुप्ता अमेरिका के ओक रिज नेशनल लैब से पोस्टडॉक्टोरल अनुभव समेटे हैं। विभाग की डीपीजीसी सदस्य और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की आयोजक रह चुकीं वे महिला वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। “महिला नेतृत्व वाले शोध को वैश्विक मान्यता मिलना गर्व का विषय है। यह आने वाली पीढ़ी को प्रोत्साहित करेगा”।

संस्थान का गौरव: यह उपलब्धि आईआईटी (आईएसएम) के शोध की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि SOFC तकनीक सफल हुई तो कोयले का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध हो सकेगा, जो ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम होगा।

 

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