धनबाद (bccl) : झरिया में फिर दहशत ,धर्मनगर में जमीन फटी, दर्जनों घरों में लंबी दरारें, लोग घर छोड़ने को मजबूर

धनबाद (bccl) : झरिया में फिर दहशत ,धर्मनगर में जमीन फटी, दर्जनों घरों में लंबी दरारें, लोग घर छोड़ने को मजबूर

धनबाद (bccl) : झरिया में फिर दहशत , धर्मनगर में जमीन फटी, दर्जनों घरों में लंबी दरारें, लोग घर छोड़ने को मजबूर

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धनबाद (bccl) : झरिया में फिर दहशत ,धर्मनगर में जमीन फटी, दर्जनों घरों में लंबी दरारें, लोग घर छोड़ने को मजबूर

धनबाद : झारखंड के धनबाद जिले के झरिया कोलफील्ड क्षेत्र में एक बार फिर भू-धंसान का खतरा मंडरा रहा है। चौथाई कुल्ही स्थित धनबाद-सिंदरी मुख्य मार्ग के पास धर्मनगर में बुधवार को अचानक जमीन में लंबी-लंबी दरारें पड़ गई हैं। इलाके के एक दर्जन से अधिक घरों की दीवारों और फर्श पर दरारें उभर आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी दहशत फैल गई है।कई जगहों पर जमीन फटने जैसा भयावह दृश्य देखने को मिल रहा है। हालांकि अभी तक जमीन पूरी तरह नहीं धंसी है, लेकिन दरारें लगातार चौड़ी होती जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर घंटे दरारों का आकार बढ़ रहा है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

लोगों में पलायन शुरू

डर के माहौल को देखते हुए कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। कुछ परिवार रात में घर के अंदर रहने से भी हिचकिचा रहे हैं। महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से आतंकित हैं।

एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हम कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, लेकिन अब जमीन हमारे पैरों तले खिसक रही है। रात को नींद नहीं आ रही। हम कब तक इस डर के साए में जिएंगे?”

झरिया की पुरानी समस्या

झरिया कोलफील्ड में 100 साल से अधिक समय से भूमिगत कोयला आग (Underground Coal Fire) धधक रही है। इसके कारण जमीन की संरचना कमजोर हो गई है और बार-बार भू-धंसान (Land Subsidence) की घटनाएं हो रही हैं।

हाल ही में टंडाबाड़ी बस्ती में हुई भू-धंसान की घटना में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। जिला प्रशासन और BCCL (Bharat Coking Coal Limited) की टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे शुरू कर दिया है।

सरकार और BCCL पर दबाव

झरिया मास्टर प्लान के तहत भूमिगत आग बुझाने, भू-धंसान रोकने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पुनर्वासित करने का काम चल रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रक्रिया बहुत धीमी है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि:तत्काल प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया जाए
खतरनाक इलाकों को चिन्हित कर खाली कराया जाए
भूमिगत आग पर प्रभावी नियंत्रण के उपाय तेज किए जाएं

 

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