90वीं शिव जयंती महोत्सव: गुमला में ब्रह्माकुमारी शिव दर्शन भवन में श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गुमला : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिव दर्शन भवन, गुमला में परमात्मा शिव की 90वीं शिव जयंती महोत्सव बड़ी ही श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी भाई-बहन तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण, सामूहिक संकल्प, आध्यात्मिक प्रवचन और सम्मान समारोह के साथ हुई। मुख्य अतिथियों में शकुंतला देवी जी, ओमप्रकाश पांडे जी तथा ब्रह्माकुमारीज की वरिष्ठ स्थानीय सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी शांति दीदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अन्य प्रमुख सहभागियों में पवन अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, संजय अग्रवाल, सहदेव महतो, बीके अमित, बीके अंजिता, बीके सुचिता, बीके मंगल आदि शामिल थे।
राजयोगिनी शांति दीदी के प्रेरक उद्बोधन
राजयोगिनी शांति दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि शिव जयंती मात्र एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-जागृति और आत्म-परिवर्तन का पावन अवसर है। उन्होंने बताया कि परमात्मा शिव निराकार, ज्योति स्वरूप परमपिता हैं, जो कलियुग के अंधकार में ज्ञान का प्रकाश फैलाने आते हैं। शिव सृष्टि के रचयिता तथा संहारक हैं, और महाशिवरात्रि व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
शांति दीदी ने ब्रह्माकुमारीज द्वारा प्रदेश में संचालित विभिन्न सेवा कार्यों का उल्लेख किया, जैसे राजयोग ध्यान, नशामुक्ति अभियान, नैतिक शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा युवा जागरण। इन सेवाओं का उद्देश्य व्यक्तिगत शांति के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों और सद्भावना की स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में बाहरी सफलताओं के बावजूद मानसिक अशांति व्याप्त है, ऐसे में राजयोग ही वह माध्यम है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़कर आंतरिक शक्ति, धैर्य और सकारात्मकता प्रदान करता है।
उन्होंने उपस्थितजनों को संदेश दिया: “हम सभी आत्माएं परमात्मा की संतान हैं। यदि हम अपने जीवन में पवित्रता, शांति और प्रेम को अपनाएं, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में स्वतः सुख-शांति का वातावरण बनेगा।” उन्होंने सभी को नकारात्मक विचारों का त्याग कर श्रेष्ठ संकल्प लेने और दैनिक जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने का आह्वान किया।
अतिथियों के विचार
शकुंतला देवी जी ने ब्रह्माकुमारीज की आध्यात्मिक सेवाओं की सराहना की, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी और नैतिक शिक्षा के प्रसार पर विशेष जोर दिया।
ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिकता, अनुशासन और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। तपकरा ब्रह्मकुमारी सेवा केंद्र के भाई शिव ने परमपिता शिव को सृष्टि व जीवन का आधार बताते हुए संस्था के सेवा कार्यों की प्रशंसा की और इसे सामाजिक उत्थान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने विश्व शांति, सद्भाव और आत्मकल्याण का संकल्प लिया। पूरा वातावरण भक्तिमय, अनुशासित और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। यह आयोजन न केवल भक्तों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरण का संदेश भी फैलाया।

















