रांची के विभिन्न इलाकों में होलिका दहन का आयोजन, होलिका दहन परंपरागत उत्साह के साथ संपन्न
रांची : राजधानी रांची के विभिन्न इलाकों में होलिका दहन का आयोजन बड़ी धूमधाम और परंपरागत तरीके से किया गया। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर शहर के कई मुहल्लों, चौकों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थानीय निवासियों ने विधि-विधान से होलिका की पूजा-अर्चना की और उसके बाद होलिका दहन किया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस दौरान बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, जुटे रहे। पूजन में महिलाओं ने विशेष रूप से हल्दी, चावल, धान की बालियां, गोबर के गोइठे और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। पूजा के बाद अग्नि प्रज्वलित कर होलिका दहन किया गया, जिसके साथ ही लोग परिक्रमा करते हुए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश ग्रहण करते नजर आए।
बता दें कि होलिका दहन हिंदू पौराणिक कथा से जुड़ा पर्व है, जिसमें भक्त प्रह्लाद की रक्षा और दैत्य होलिका के अंत की याद में यह अनुष्ठान किया जाता है। यह बुराई के विनाश और सत्य-अहिंसा की विजय का प्रतीक माना जाता है।
रांची में इस साल होलिका दहन मुख्य रूप से 2 मार्च की रात को भद्रा काल समाप्त होने के बाद (रात 12:50 बजे के आसपास) शुरू हुआ, और कई जगहों पर इसे देर रात तक जारी रखा गया। शहर के किशोरगंज चौक, हरमू, टाटीसिलवे, आदर्श नगर जैसे इलाकों में यह खासा देखने को मिला। स्थानीय समितियों और निवासियों ने सुरक्षा के भी पूरे इंतजाम किए थे।
होलिका दहन के बाद अब 4 मार्च को रंगों वाली धुलेंडी (रंग वाली होली) खेली जाएगी, जिसके लिए शहरवासी उत्साहित हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और खुशियों का भी प्रतीक है।

















