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किशन दा का आखिरी पत्र आया सामने ! क्या झारखंड में दम तोड़ रहा है माओवादी सशस्त्र संघर्ष?

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रांची जेल में किशन दा की मौत से पहले लिखा गया पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने माओवादी सशस्त्र संघर्ष को झारखंड में असंभव बताते हुए रणनीति बदलने की सलाह दी है।

रांची: झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठन के भीतर मचे आंतरिक घमासान और रणनीतिक बदलाव का एक बड़ा खुलासा एक पत्र के माध्यम से सोसल मीडिया में वायरल हुआ है। रांची जेल में अपनी मृत्यु से पहले संगठन के शीर्ष नेता ‘किशन दा’ द्वारा लिखा गया एक बेहद गोपनीय और संवेदनशील पत्र सामने आया है। इस पत्र ने संगठन की मौजूदा स्थिति को  बेहद जटिल और गंभीर” बताते हुए सशस्त्र संघर्ष के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कॉमरेड सागर’ को लिखी गई थी आखिरी चिट्ठी

यह पत्र संगठन के कद्दावर नेता ‘कॉमरेड सागर’ (जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां  मिसिर बेसरा  के रूप में पहचानती हैं) के नाम लिखा गया था। पत्र में किशन दा ने जो बातें लिखी हैं, वे संगठन की आंतरिक कमजोरी और टूट की ओर साफ इशारा करती हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान घरेलू परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष (Armed Struggle) को आगे बढ़ाना अब लगभग  असंभव होता जा रहा है।

CRB और ERB क्षेत्रों में भारी नुकसान का जिक्र

किशन दा ने पत्र में इस बात को स्वीकार किया है कि संगठन को CRB  (Central Regional Bureau) और  ERB  (Eastern Regional Bureau) जैसे मुख्य कार्यक्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। लगातार कमजोर होते नेटवर्क और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने मौजूदा रणनीति पर तुरंत पुनर्विचार करने की आवश्यकता जताई है।

रणनीति पर उठाए गंभीर सवाल

पत्र में किशन दा ने नेतृत्व से कड़े सवाल पूछते हुए कहा है:

क्या वर्तमान परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष को जारी रखना व्यावहारिक और सही कदम होगा?
बिना जमीनी हकीकत को समझे आगे बढ़ने से संगठन का नुकसान और बढ़ सकता है।
यदि वर्तमान दिशा में ही कदम बढ़ाए गए, तो कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा और हालात और अधिक उलझ जाएंगे।

जेल से भी सक्रिय था संवाद तंत्र

अगर इस पत्र में थोड़ी सी भी सच्चाई है तो इस खुलासे का सबसे चौंकाने वाला पहलू पत्र का अंत है। किशन दा ने एक फोन नंबर साझा करते हुए ‘कॉमरेड सागर’ से जल्द प्रतिक्रिया मांगी थी, ताकि आगे की नई रणनीति तय की जा सके। साथ ही, उन्होंने संगठन के सदस्यों को भारी सतर्कता और सावधानी बरतने की सख्त हिदायत भी दी थी।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम सुराग

किशन दा की मौत से पहले लिखा गया यह पत्र न केवल माओवादियों की वैचारिक हार को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि संगठन के भीतर अब हिंसा के रास्ते को लेकर दो फाड़ की स्थिति है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह पत्र झारखंड में माओवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

नोट :- दृष्टि नाउ इस पत्र की पुष्टि नही करता है। 

 

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