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जनरल एमएम नरवणे की किताब पर विवाद: राहुल गांधी के संसद जिक्र के बाद क्या बोले पूर्व सेना प्रमुख?

नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में इस किताब का जिक्र करते हुए मोदी सरकार पर चीन के साथ सीमा विवाद में विफलता का आरोप लगाया। लेकिन किताब के अंशों से पता चलता है कि भारतीय सेना ने चीनी टैंकों को पीछे हटने पर मजबूर किया था, जो भारत की सैन्य सफलता को दर्शाता है। हालांकि, किताब में सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देशों की कमी का उल्लेख है, जिसने राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया।

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किताब में क्या लिखा है जनरल नरवणे ने?

जनरल नरवणे की किताब में 2020 के लद्दाख स्टैंडऑफ का विस्तृत वर्णन है। विशेष रूप से रेचिन ला पर हुई घटना का जिक्र है, जहां 31 अगस्त 2020 को चीनी टैंकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की। किताब के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने जनरल नरवणे को सूचना दी कि चार चीनी टैंक भारतीय पोजीशंस की ओर बढ़ रहे थे।

नरवणे ने तुरंत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस जयशंकर से संपर्क किया। उन्होंने हर किसी से पूछा, “मेरे ऑर्डर्स क्या हैं?” लेकिन स्पष्ट निर्देश नहीं मिले। किताब में लिखा है कि मौजूदा प्रोटोकॉल के अनुसार, फायरिंग के लिए ‘टॉप लेवल’ से क्लियरेंस जरूरी था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

आखिरकार, भारतीय सैनिकों ने चेतावनी फायर किया, लेकिन चीनी टैंक आगे बढ़ते रहे। नरवणे ने लिखा है कि स्थिति गंभीर थी, लेकिन भारतीय सेना ने दृढ़ता दिखाई और चीनी टैंकों को पीछे हटने पर मजबूर किया। यह घटना कैलाश रेंज पर भारतीय कब्जे से जुड़ी थी, जहां ऊंचाई रणनीतिक महत्व रखती है।

राहुल गांधी ने संसद में क्यों किया जिक्र?

राहुल गांधी ने लोकसभा में ‘द कैरवन’ मैगजीन के एक आर्टिकल से किताब के अंश पढ़ने की कोशिश की, जिसमें डोकलाम या गलवान जैसी घटनाओं का जिक्र है। उन्होंने कहा कि किताब मोदी सरकार की ‘विफलता’ को उजागर करती है, जहां सेना को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए। लेकिन बीजेपी नेताओं ने इसका विरोध किया, क्योंकि किताब अनपब्लिश्ड है और संसदीय नियमों के तहत इसे पढ़ना अनुमति नहीं। स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल को रोकते हुए कहा कि अनपब्लिश्ड दस्तावेज को उद्धृत नहीं किया जा सकता।

राहुल ने बाद में कहा, “यह मैं नहीं कह रहा, यह पूर्व सेना प्रमुख ने किताब में लिखा है।” उन्होंने दावा किया कि किताब को प्रकाशित होने से रोका जा रहा है, क्योंकि यह मोदी सरकार की ‘सच्चाई’ उजागर करेगी।

जनरल नरवणे का क्या स्टेटमेंट?

जनरल नरवणे ने किताब के बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा कुछ नहीं कहा है, क्योंकि यह अभी प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन किताब के अंशों से साफ है कि उन्होंने सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। एक रेडिट थ्रेड में किताब से उद्धृत है: “मुझे अपने टैंकों को आगे बढ़ाने दो, उनकी गन्स चीनी टैंकों की ओर पॉइंट करके, साफ मैसेज देकर कि वे उड़ा दिए जाएंगे।” यह दर्शाता है कि नरवणे सक्रिय रुख चाहते थे, लेकिन ऊपरी स्तर से क्लियरेंस की कमी थी।

बीजेपी ने राहुल के दावों को खारिज किया और कहा कि किताब भारतीय सेना की सफलता को दिखाती है, न कि विफलता। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि अनपब्लिश्ड किताब का जिक्र नियमों के खिलाफ है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार किताब को दबा रही है, क्योंकि यह मोदी की ‘सच्चाई’ उजागर करेगी।

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