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बांग्लादेश में डेढ़ साल बाद आज हो रहे आम चुनाव: अवामी लीग पर प्रतिबंध, धार्मिक हिंसा और निष्पक्षता पर सवाल

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हो रहे हैं। लगभग 1.5 साल बाद बांग्लादेश में आज (12 फरवरी 2026) को आम चुनाव ही रहा है। अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद होने वाले इन चुनावों पर भारत, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर टिकी हुई है।

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नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने चुनावों की तैयारी की है और इन्हें “स्वतंत्र और निष्पक्ष” बताते हुए शांतिपूर्ण मतदान की अपील की है। करीब 12.7 करोड़ मतदाता 300 सीटों वाली संसद के लिए वोट डाल रहे हैं, साथ ही संवैधानिक सुधारों पर रेफरेंडम भी हो रहा है।

अवामी लीग पर प्रतिबंध: सबसे बड़ी पार्टी बाहर

चुनावों की सबसे बड़ी विवादास्पद बात यह है कि शेख हसीना की अवामी लीग, जो पिछले कई चुनाव जीत चुकी थी, उसको प्रतिबंधित कर दिया गया है। अंतरिम सरकार ने मई 2025 में सुरक्षा कारणों से पार्टी की गतिविधियां निलंबित कीं और चुनाव आयोग ने उसका पंजीकरण सस्पेंड कर दिया। नवंबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने हसीना को अनुपस्थित में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई।

अवामी लीग के लाखों समर्थकों को वोट देने का विकल्प नहीं मिल रहा, जिससे विपक्षी दलों पर सवाल उठ रहे हैं। हसीना, जो भारत में निर्वासित हैं, उन्होंने इन चुनावों को “धोखाधड़ी” करार दिया है और कहा है कि इससे लाखों लोगों में असंतोष बढ़ेगा।

मुख्य मुकाबला: बीएनपी vs जमात-ए-इस्लामी गठबंधन

अवामी लीग के बाहर होने से मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के बीच है। बीएनपी के चेयरमैन तारिक रहमान को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है, जबकि जमात-ए-इस्लामी ने छात्र आंदोलन से निकले नेशनल सिटिजन्स पार्टी (एनसीपी) जैसे नए दलों के साथ गठजोड़ किया है।

धार्मिक हिंसा में उछाल: अल्पसंख्यकों पर हमले

शेख हसीना के हटने के बाद बांग्लादेश में धार्मिक हिंसा में तेजी आई है। हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (बीएचबीसीयूसी) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2024 से अब तक 2,000 से ज्यादा साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हमले शामिल हैं। रिपोर्ट्स में 60 से ज्यादा हत्याएं, महिलाओं पर हमले और मंदिरों पर तोड़फोड़ का जिक्र है।

2025 में भी हिंसा जारी रही, जिसमें दिसंबर में कई हिंदू युवकों की हत्या हुई। मानवाधिकार संगठनों ने अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में नाकामी का आरोप लगाया है। चुनाव से पहले हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजनीतिक हिंसा और निष्पक्षता पर सवाल

चुनावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अवामी लीग समर्थकों की गिरफ्तारियां, राजनीतिक हिंसा और कुछ इलाकों में डर का माहौल रिपोर्ट किया जा रहा है। यूनुस सरकार ने भारी सुरक्षा बल तैनात किए हैं, लेकिन आलोचक कहते हैं कि अवामी लीग के बाहर होने से चुनाव “एकतरफा” हो गए हैं।

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