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मद्रास हाईकोर्ट ने एमएस धोनी को मानहानि केस में 10 लाख रुपये जमा करने का दिया निर्देश, जानिए क्या है पूरा मामला

चेन्नई : मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को उनके लंबित मानहानि मुकदमे में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। न्यायमूर्ति आर. एन. मंजुला ने 11 फरवरी 2026 को पारित आदेश में धोनी को केस से जुड़ी सीडी के कंटेंट के ट्रांसक्रिप्शन (लिप्यंतरण) और अनुवाद (ट्रांसलेशन) के खर्च के रूप में 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। यह राशि मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड में 12 मार्च 2026 तक जमा करानी होगी।

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धोनी ने वर्ष 2014 में 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग के साथ मानहानि का सिविल सूट दायर किया था। यह मुकदमा सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार, कुछ पत्रकारों और मीडिया हाउसों (जैसे ज़ी मीडिया) के खिलाफ है। धोनी का आरोप है कि 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग घोटाले से उन्हें गलत तरीके से जोड़ा गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा।

केस में सबूत के तौर पर पेश की गई सीडी (कॉम्पैक्ट डिस्क) में हिंदी भाषा में न्यूज क्लिप्स, टीवी डिबेट्स और संबंधित सामग्री मौजूद है। अक्टूबर 2025 के पिछले आदेश के बाद कोर्ट के आधिकारिक दुभाषिया (इंटरप्रिटर) ने इस सामग्री का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद शुरू किया था, लेकिन यह कार्य बहुत बड़ा होने के कारण शुल्क के भुगतान पर निर्भर है।

न्यायमूर्ति मंजुला ने आदेश में स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में वादी को स्वयं दस्तावेजों का अनुवाद कराकर वाद पत्र के साथ प्रस्तुत करना होता है। लेकिन इस मामले में विशेष परिस्थितियों के कारण आधिकारिक दुभाषिया (इंटरप्रिटर) की सेवाएं ली गई हैं, इसलिए खर्च वहन करना वादी की जिम्मेदारी है।

अदालत ने दुभाषिया (इंटरप्रिटर) को निर्देश दिया है कि वह संबंधित सीडी की सामग्री का लिप्यंतरण (ट्रांसक्रिप्शन) और अनुवाद मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह तक पूरा करें। साथ ही, धोनी को 10 लाख रुपये की राशि 12 मार्च 2026 तक मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड के खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अनुवाद मुख्य रूप से किस भाषा से संबंधित है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार सामग्री हिंदी में है।

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