गांवों में मवेशियों का टीकाकरण नहीं हो रहा: सिमडेगा विधायक ने सदन में सरकार से मांगा जवाब, ग्रामीणों को हो रहा आर्थिक नुकसान
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची/सिमडेगा : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में सिमडेगा जिले की पशु चिकित्सा सेवाओं और टीकाकरण की खामियों को लेकर जोरदार बहस हुई। कांग्रेस के सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से इस गंभीर मुद्दे को सदन में उठाया और ग्रामीण पशुपालकों की कई शिकायतों से अवगत कराया।
विधायक ने पूछा कि क्या सिमडेगा जिला कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है? सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि जिले की आर्थिक रीढ़ आज भी मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन ही है। भूषण बाड़ा ने आगे पशुओं के टीकाकरण, पशु चिकित्सकों की उपलब्धता और पशुपालकों को मिलने वाले प्रशिक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि जिले में पशुओं का टीकाकरण मुख्य रूप से एआई वर्कर और पैरावेट के माध्यम से किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में कुल 7 पशु चिकित्सा पदाधिकारी पदस्थापित हैं। सभी प्रखंडों और पंचायतों में विशेष पशु चिकित्सा शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इस वित्तीय वर्ष में अब तक 1,26,581 पशुओं का टीकाकरण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 1,423 पशुओं का उपचार और 4,929 पशुओं का बंध्याकरण भी किया गया है। पशुपालकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था रांची स्थित किसान प्रशिक्षण केंद्र में की जाती है।
हालांकि, विधायक भूषण बाड़ा ने सरकार के इस जवाब पर खुलकर असंतोष जताया। उन्होंने सदन में कहा, “क्षेत्र भ्रमण के दौरान पशुपालकों से लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। पशु चिकित्सक गांवों में जाकर टीकाकरण नहीं करते, प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय भी ठीक से नहीं खुलते। इस कारण बीमारियों से मुर्गियों और मवेशियों की मौत हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।”
विधायक ने मांग की कि पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया जाए, अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति हो और गांव-गांव में नियमित टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि पशुपालकों की आय प्रभावित न हो।

















