Government tough on paper leaks: Provision for 10-year imprisonment and ₹10 crore fine; Cabinet approves amendment bill.

पेपर लीक पर सरकार सख्त: 10 साल की सजा और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कैबिनेट ने संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

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Government tough on paper leaks: Provision for 10-year imprisonment and ₹10 crore fine; Cabinet approves amendment bill.
Government tough on paper leaks: Provision for 10-year imprisonment and ₹10 crore fine; Cabinet approves amendment bill.

नई दिल्ली : प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक से संबंधित संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं, ताकि परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास कायम रखा जा सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए संशोधन में पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को निर्देशित किया जाएगा कि वे ऐसे मामलों का निपटारा अधिकतम तीन महीने के भीतर करें। इसके साथ ही दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

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जानकारी के मुताबिक, सरकार अगले सप्ताह संसद में इस विधेयक को पेश कर सकती है। संभावना जताई जा रही है कि 27 जुलाई को इसे सदन में प्रस्तुत किया जाए। हाल के दिनों में पेपर लीक के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है, जिसके चलते कार्यवाही भी प्रभावित हुई।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक को देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया था। उन्होंने कहा था कि सरकार ने पिछले ढाई महीनों में कई ठोस कदम उठाए हैं और दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाना था। इसी उद्देश्य से कम समय में 22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई और 19 जुलाई को उसके परिणाम भी जारी कर दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल तात्कालिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी और कठोर कानूनी व्यवस्था तैयार की जा रही है।

नए विधेयक को सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ संगठित अपराध के रूप में उभर रहे पेपर लीक नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।

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