बरवाडीह छिपादोहर केचकी में ट्रेन ठहराव को लेकर 10 को धरना सह उपवास औऱ 15 दिसंबर को होगा चक्का जाम.
लातेहार, मो० अरबाज.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!लातेहार/बरवाडीह : कोरोना काल के बीच रेलवे बोर्ड औऱ राज्य सरकार के सहमति से आम लोगो की आवागमन की सुविधा को देखते हुए सवारी ट्रेनों का परिचालन की शुरुआत की गई, पर सीआईसी सेक्शन से गुजरने वाली किसी भी ट्रेन का ठहराव धनबाद रेल मंडल के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन बरवाडीह के साथ साथ केचकी छिपादोहर में नही दिया गया। वहीं इस स्टेशनों पर ट्रेन ठहराव को लेकर स्थानीय सांसद विधायक के द्वारा रेल मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया पर अब तक कोई सार्थक परिणाम नही आया जिसे स्थानीय लोगो के आक्रोश है।
वहीं ट्रेन के ठहराव को लेकर आंदोलन करने के लिए शनिवार को पुराने ब्लॉक परिसर बैठक आयोजित की गई। जहाँ बैठक में मौजूद लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ धनबाद रेल मंडल के डीआरएम स्थानीय सांसद और विधायक के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी राकेश सहाय और रेलवे स्टेशन प्रबंधक अनिल कुमार द्विवेदी को ज्ञापन देते हुए आगामी 10 दिसंबर को ट्रेन के ठहराव कराने की मांग को लेकर रेलवे स्टेशन परिसर बरवाडीह में एक दिवसीय धरने सह उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
साथ ही साथ 15 दिसम्बर को रेल चक्का जाम किया जाएगा औऱ माँग पूरी नही होने तक आंदोलन जारी रखने की भी चेतावनी दी गई । वही सामाजिक कार्यकर्ता कन्हाई सिंह ने कहा कि क्षेत्र के लोगों के साथ रेल सेवा के नाम पर अनदेखी किसी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और इसको लेकर उग्र आंदोलन को क्षेत्र की जनता तैयार हो चुकी है और अब जब तक मांगों पर पूरी तरह से विचार नहीं किया जाएगा तब तक आंदोलन लगातार बढ़ता जाएगा।
इस दौरान मौके पर अपना अधिकार अपना सम्मान मंच के संस्थापक शशि शेखर यूथ कांग्रेस, नमो एप लोकसभा सयोंजक दिलीप सिंह यादव, पलामू प्रमंडल के समन्वयक हिमांशु गुप्ता रिककी, आजसू पार्टी के जिला संयोजक वीरेंद्र ठाकुर, झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और व्यवसायिक संघ के उपाध्यक्ष गुलाम अनवर, गुलाम असगर, साजन सिंह, प्रभाकर, दीपक राज, दीपू, हर्षित सिंह, आविनाश कुमार, नमित सिंह चौहान, अजय कुमार, वारिस खान, सुबोध सोनी, विनोद पासवान, गौतम पांडे, जैकी चंद्रा, फिरोज अहमद, सतीश कुमार यादव पुनीत, सिंह समेत काफी संख्या में स्थानीय युवा और ग्रामीण मौजूद थे।

















