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घुसपैठियों के खिलाफ CM हिमंता बिस्वा सरमा का ताबड़तोड़ एक्शन, 33 बांग्लादेशी नागरिक वापस भेजे गए

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी कठोर नीति को और तेज करते हुए 33 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस उनके देश भेज दिया। यह कार्रवाई राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें अवैध प्रवासियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है।

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मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “असम पुलिस ने 33 नए घुसपैठियों को उनके देश बांग्लादेश वापस भेज दिया है। हमारी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये घुसपैठिए किस जिले से पकड़े गए या किस सीमा क्षेत्र से वापस भेजे गए।

मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई दो स्तरों पर हो रही है। पहला, 1971 के बाद अवैध रूप से असम में रह रहे लोगों को चिह्नित कर वापस भेजा जा रहा है, और दूसरा, नये घुसपैठियों को तुरंत पकड़कर सीमा पार भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) एक्ट, 1950 के तहत हमें 1971 के बाद आए किसी भी विदेशी को वापस भेजने का अधिकार है। हम इस शक्ति का उपयोग कर रहे हैं और इसे और बढ़ाएंगे।”

पिछले कुछ महीनों में असम सरकार ने 450 से अधिक कथित अवैध प्रवासियों को वापस बांग्लादेश भेजा है। सीएम सरमा ने पहले भी दावा किया था कि हर हफ्ते औसतन 70 से 100 घुसपैठियों को वापस भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार असम की जनसांख्यिकी और स्वदेशी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध घुसपैठ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और सख्त होगी।

असम पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बांग्लादेश के साथ 1,885 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। पिछले साल बांग्लादेश में अशांति शुरू होने के बाद से यह सतर्कता और तेज कर दी गई है।

हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने दावा किया है कि कई लोगों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के बांग्लादेश भेजा जा रहा है, जिसमें कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। संगठन ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है।ल

इसके जवाब में, सीएम सरमा ने कहा कि उनकी सरकार असम समझौते (1985) के तहत काम कर रही है, जिसमें 24 मार्च 1971 के बाद आए प्रवासियों को चिह्नित कर वापस भेजने का प्रावधान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है, उन्हें हिरासत केंद्रों में रखा गया है, लेकिन बाकी को तुरंत वापस भेजा जा रहा है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। असम कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की है कि जिनकी जमीन वापस ली गई, उन्हें मुआवजा दिया जाए। जवाब में, सरमा ने कहा कि सात जन्मों में भी असम की जनता ऐसा नहीं होने देगी।

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