पेसा प्रस्ताव को सार्वजनिक करने की मांग तेज, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना
रांची : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पेसा (पंचायती राज विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम) से संबंधित कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की हिम्मत क्यों नहीं हो रही इस प्रस्ताव को जनता के सामने लाने की?
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मरांडी ने कहा, “यह स्पष्ट है कि कहीं न कहीं कोई ऐसी बात है जिसे राज्य सरकार जनता से छुपा रही है। एक तरफ सरकार पेसा प्रस्ताव पारित करने के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रही है और स्वागत करवा रही है, लेकिन प्रस्ताव में क्या है, यह बताने से भाग रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि पेसा एक्ट उस समाज की परंपराओं, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों और शासन व्यवस्था से जुड़ा है, लेकिन आज उसी समाज को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है। जनता और जनप्रतिनिधि भी केवल मीडिया में छपी खबरों पर निर्भर हैं। मरांडी ने सरकार से मांग की कि पारित प्रस्ताव को शीघ्र सार्वजनिक किया जाए ताकि जनता दिग्भ्रमित न हो।
निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराने की वकालत
बाबूलाल मरांडी ने निकाय चुनावों को दलीय आधार पर कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि दलीय आधार पर चुनाव होने से विभिन्न दलों के सेवा कार्य करने वाले कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि बनकर संविधान के दायरे में अधिक सक्रियता से जनता की मदद कर सकेंगे। गैर-दलीय चुनाव मसल और मनी पावर को बढ़ावा देते हैं, जो स्वच्छ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने भी पेसा प्रस्ताव पारित होने के बाद उसे सार्वजनिक न करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में रूढ़िजन्य परंपराओं और व्यवस्थाओं पर आधारित है। यह प्राचीन पारंपरिक सुशासन एवं स्वशासन व्यवस्था को संरक्षित और संवर्धित करता है। मुंडा ने भी कैबिनेट प्रस्ताव को सार्वजनिक डोमेन में लाने की मांग की।
प्रदेश प्रभारी की बैठक पर सफाई
इस बीच, भाजपा प्रदेश प्रभारी एवं सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने हालिया बैठक को पूरी तरह सांगठनिक बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में सांगठनिक विषयों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेता समय-समय पर ऐसी बैठकें कर नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करते रहते हैं।
















