झारखंड में जंगली हाथियों का कहर बरकरार: हजारीबाग और चाईबासा में दहशत का माहौल
झारखंड में जंगली हाथियों का कहर बरकरार: हजारीबाग और चाईबासा में दहशत का माहौल
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रांची/हजारीबाग/चाईबासा, 08 जनवरी : झारखंड के विभिन्न जिलों में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हजारीबाग में एक युवक की मौत और उसकी पत्नी के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने जहां गांवों में दहशत फैला दी है, वहीं पश्चिमी सिंहभूम जिले (चाईबासा) में हाथी हमलों से मृतकों की संख्या 17 तक पहुंच गई है। वन विभाग की उदासीनता पर ग्रामीणों में आक्रोश है, जबकि प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
हजारीबाग: चुटियारो गांव में हाथी ने मचाया तांडव, युवक की मौत
हजारीबाग सदर प्रखंड के चुटियारो (सरौनी) गांव में झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी ने दंपती पर अचानक हमला कर दिया। हमले में युवक आदित्य राणा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायल महिला को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि यह हाथी कई दिनों से गांव और आसपास के जंगलों में घूम रहा था। कई बार वन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि समय पर हाथी को भगाया जाता, तो यह हादसा टल सकता था। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग रात में घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं।
चाईबासा: हाथी हमले में एक और महिला की मौत, मृतकों की संख्या 17 हुई
पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथी का आतंक जारी है। 6 जनवरी को दंतैल हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई एक महिला की सदर अस्पताल चाईबासा में इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे जिले में हाथी हमलों से मरने वालों की कुल संख्या 17 हो गई है।पिछले कुछ दिनों में गोइलकेरा, नोवामुंडी और अन्य क्षेत्रों में हाथी ने कई परिवारों को निशाना बनाया है, जिसमें एक ही रात में कई मौतें हुईं। ग्रामीण इलाकों में लोग सोते समय भी सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन की अपील:
ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देशचाईबासा जिले में हाथी की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग और प्रशासन ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को जंगल में न जाने, रात में अकेले बाहर न निकलने और हाथी दिखने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया है। गांव-गांव माइकिंग और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
जाहिर है झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से समस्या बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों का क्षरण और कॉरिडोर का अवरोध इसकी मुख्य वजह है।
















