पश्चिमी सिंहभूम में जंगली हाथी का कहर: एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, बच्ची गंभीर रूप से घायल

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पश्चिमी सिंहभूम में जंगली हाथी का कहर: एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, बच्ची गंभीर रूप से घायल

पश्चिमी सिंहभूम में जंगली हाथी का कहर: एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, बच्ची गंभीर रूप से घायल

चाईबासा, : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार देर रात गोईलकेरा प्रखंड के जंगल क्षेत्र में एक दंतैल हाथी ने लकड़ी की झोपड़ी पर हमला कर दिया, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में पिता और उनके दो मासूम बच्चे शामिल हैं।मृतकों की पहचान कुंदरा बाहदां (पिता), कोदमा बाहदां (पुत्र) और सामू बाहदां (पुत्री) के रूप में हुई है। इसी हमले में परिवार की एक अन्य बच्ची जिंगी बाहदां गंभीर रूप से घायल हो गई। उनके सिर में गहरी चोट लगी है, जिसके बाद प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए ओडिशा के राउरकेला रेफर कर दिया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत के रूप में 20,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। आवश्यक कागजी कार्रवाई भी पूरी की गई है। वन अधिकारियों के अनुसार, झुंड से बिछड़ा यह दंतैल हाथी पिछले कई दिनों से क्षेत्र में उत्पात मचा रहा है।

यह घटना जनवरी की शुरुआत से जारी हाथी आतंक की कड़ी है। पिछले छह दिनों में इस हाथी ने अलग-अलग घटनाओं में कुल 9 लोगों की जान ले ली है, जिनमें से ज्यादातर गोईलकेरा और आसपास के प्रखंडों में हुई हैं। इससे पहले भी महिलाओं और बच्चों सहित कई ग्रामीणों की मौत हुई है।

ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई गांवों में लोग रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। वन विभाग पर हाथी को नियंत्रित करने में नाकामी के आरोप लग रहे हैं। विभाग ने हालांकि हाथी को ट्रैक करने के लिए टीम तैनात की है और ग्रामीणों को जंगल क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है।

पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा जंगल क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक निवास है, लेकिन आवासीय अतिक्रमण और कॉरिडोर बाधित होने से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से चली आ रही यह समस्या अब गंभीर चुनौती बन गई है।

 

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