Hazaribagh Police:-हजारीबाग पुलिस की फाइल में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को बताया मृत, साजिश करने वालों पर लगाई धारा 302
Hazaribagh Police
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झारखंड के पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव पुलिस की फाइल में मृत घोषित कर दिए गए हैं। उनकी हत्या की साजिश से संबंधित दर्ज एफआईआर में धारा 302 लगा दिया गया है। पूरा माजरा बड़कागांव थाना का है। बड़कागांव के तत्कालीन थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक केशव कुमार ने कोर्ट में चार्जशीट भी दायर कर कर दिया है। चार्जशीट में धारा 120 बी और 302 के तहत न्यायालय में मामला भी चल रहा है। पुलिस ने जिसे हत्या की साजिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया उसके ऊपर हत्या का मामला थाना में दर्ज कर दिया। 24 फरवरी को 2 लोग बबुआ और भोला यादव की गवाही भी इस मामले में हुई है। तब जाकर मामला प्रकाश में आया है।
2008 में बड़कागांव पुलिस ने चार लोगों पर दर्ज की एफआईआर
मामला 2008 का है। बड़कागांव पुलिस ने 20 फरवरी 2008 को केदार महतो, जुबेर खान, भोला यादव, मनोज गोप और विजय यादव पर एफआईआर दर्ज किया। विजय यादव के बयान पर यह बात स्पष्ट हुआ कि झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की हत्या करने की साजिश रची जा रही थी। जिनमें इन लोगों की संलिप्तता थी। पुलिस ने एफआईआर में बताया है कि 25 फरवरी 2008 को गुप्त सूचना मिली की विजय यादव अपने साथी के साथ मिलकर बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में विश्रामपुर जंगल में जमे हुए हैं।
सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने छापेमारी की और विजय यादव को हिरासत में लिया। वहीं अन्य आरोपी भागने में सफल हो गए। जब पुलिस ने गिरफ्त में आए आरोपी विजय यादव से पूछताछ की तो पता चला कि झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की हत्या की योजना बनाने के लिए सभी इकट्ठा हुए हैं। विजय यादव के पास से बंदूक, जिंदा कारतूस, मोबाइल और दो सिम भी बरामद किया गया। जब उससे कड़ाई से पूछा गया तो उसने बताया कि केदार महतो सड़क निर्माण कर रहा था।
उसी दौरान माओवादी बबुआ सिंह से उसकी मुलाकात हुई। उसने योगेंद्र साव की हत्या करने को कहा। बबुआ सिंह बताया कि वह जेपीसी का आदमी है। एमसीसी का काफी लेवी का पैसा पचा लिया है और कई लोगों को जेल भिजवा दिया। ऐसे में जल्द से जल्द इसकी हत्या किया जाए। इस पर केदार महतो अपने साथी जुबेर खान को योगेंद्र साव की हत्या करने का प्लान बनाने को कहा। इसी क्रम में विजय यादव को जंगल में बुलाकर ₹2 लाख नगद और ₹40 हजार रुपया का हथियार खरीदने के लिए बोला गया।
अब धारा 307 का मामला चलेगा
एफ आई आर में बताया गया कि विजय यादव, अशोक गोप, जुबेर खान और भोला गोप सभी हजारीबाग से मोटरसाइकिल से 20 फरवरी 2008 को योगेंद्र साव की हत्या करने के लिए बड़कागांव जाने के क्रम में उसका पीछा किया। लेकिन मोटरसाइकिल खराब होने के कारण घटना को अंजाम नहीं दे पाया। उन लोगों की योजना थी कि घाटी में रोककर उसे गोली मारकर हत्या कर दिया जाए। एफआईआर में बताया गया है कि यह बयान विजय यादव ने स्वयं दिया। लेकिन विजय यादव की गिरफ्तारी होने से योगेंद्र की हत्या नहीं हो सकी।
लेकिन पुलिस ने इस पूरे मामले में आरोपियों पर योगेंद्र साव की हत्या का मामला दर्ज कर दिया और चार्जशीट भी कोर्ट में दायर कर दिया। धारा 302 के तहत कार्रवाई करने की बात कही गई। ऐसे में यह हास्यप्रद हो गया कि जिसकी हत्या भी नहीं हुई है और आरोपियों के ऊपर धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया। हालांकि इस मामले को लेकर बचाव पक्ष के अधिवक्ता 302 धारा को क्वाइस करने के लिए हाईकोर्ट भी गए। अब धारा 307 का यह मामला चलेगा।
जानकार बोले
कानून के जानकार बताते हैं कि हत्या के आरोपी व्यक्तियों पर धारा 302 के तहत कोर्ट में मुकदमा चलाया जाता है। इसके अलावा, हत्या के मामले में आरोपी को दोषी पाए जाने पर धारा 302 के तहत सजा दी जाती है। धारा 302 के अनुसार आरोपी को या तो आजीवन कारावास या मृत्युदंड (हत्या की गंभीरता के आधार पर) के साथ – साथ जुर्माने की सजा दी जाती है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों पर आर्म्स एक्ट की धारा (25 व 27) लगाती है । इसमें अधिकतम सात साल की सजा होती है, जबकि इसी एक्ट की धारा (25-1 क) में आजीवन कारावास का प्रावधान है। धारा 120बी आईपीसी आपराधिक साजिश के अपराध को आकर्षित करने के लिए समझौते का भौतिक रूप से प्रकट होना आवश्यक है।

















