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10 जुलाई को हुए तबादले में कुछ IAS ने अभी तक नहीं लिया पदभार ,राजयपाल के प्रधान सचिव का पद चर्चा में !

 

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झारखण्ड में तबादलों को लेकर हमेशा सुर्खियां बनती है।  झारखण्ड में 10 जुलाई को हुए तबादले में एक बार फिर से नयी स्टोरी को जन्म दिया है। बताया जा रहा है की 10 जुलाई को हुए तबादले में कुछ आईएएस अभी तक ज्वाइन नहीं किये है।  इसमें नितिन मदन कुलकर्णी का  शामिल है जिन्हे रांची कमिश्नरी के अलावा राजभवन के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार था। 10 जुलाई की सूची में शामिल सभी 16 आईएएस अधिकारी ने अपना प्रभार ग्रहण कर काम शुरू कर दिया. लेकिन राज्यपाल के प्रधान सचिव के प्रभार पर कार्यरत नितिन मदन कुलकर्णी अभी भी राज्यपाल के प्रधान सचिव के पद पर बने हुए हैं. दरअसल नितिन मदन कुलकर्णी दक्षिणी छोटानागपुर के आयुक्त के पद थे. उनके पास राज्यपाल के प्रधान सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार भी था. नितिन मदन कुलकर्णी का तबादला राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पर कर दिया गया और राज्यपाल के प्रधान सचिव का प्रभार वित्त विभाग के सचिव राहुल शर्मा को दे दिया गया था.

 
10 जुलाई के तबादले के बाद 13 जुलाई को फिर से कार्मिक की तरफ से अदिसूचना जारी की गयी. इस अधिसूचना में दो आईएएस अधिकारियों के तबादले को रोक दिया गया था. लेकिन राज्यपाल की आपत्ति के बावजूद उनके प्रधान सचिव पर सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया. दरअसल श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के तत्कालीन सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो को दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल का आयुक्त बनाया गया था, लेकिन इस आदेश को रद्द कर दिया गया. टोप्पो पहले की तरह ही श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव बनाया गया. इसके साथ ही के श्रीनिवासन से श्रम नियोजन विभाग के सचिव का प्रभार वापस लेते हुए वापस श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान का निदेशक बनाया गया है और उन्हें दक्षिणी छोटानागपुर प्रमुंडल के आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया.


ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि राजभवन और सीएमओ किसी वजह से चर्चा में हो. ऐसा कई मौका आया जब राजभवन सरकार के फैसलों पर असहमत होते दिखा है. इस बार भी ऐसा ही देखा जा रहा है. राजभवन के प्रधान सचिव के तबादले के बाद राजभवन की ओर से प्रभारी मुख्य सचिव अरुण सिंह से पूछा गया था कि राजभवन की सहमति तबादले से पहले क्यों नहीं ली गयी थी. इस मामले को लेकर अरुण कुमार सिंह ने राज्यपाल से मुलाकात भी की थी. लेकिन सरकार अपने स्टैंड पर 15 दिनों के बाद भी कायम है. जबकि नितिन मदन कुलकर्णी आज भी राजभवन का काम-काज देख रहे हैं. वहीं राहुल शर्मा ने भी राजभवन जाने और प्रभार लेने की कोई पहल नहीं की है.
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