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चंडीगढ़ में IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: हरियाणा सरकार के ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी, 4 कर्मचारी सस्पेंड; निजी बैंकों से खाते 31 मार्च तक बंद करने के आदेश

चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक की एक शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में करीब 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। बैंक ने खुद स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करते हुए बताया कि कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर अनधिकृत और फर्जी लेन-देन किए। इस मामले में बैंक ने चार संदिग्ध कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है।

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बैंक की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि यह गड़बड़ी केवल चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के कुछ विशिष्ट खातों तक सीमित है। धोखाधड़ी तब सामने आई जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, लेकिन बैलेंस में भारी अंतर सामने आया। बैंक ने स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट के लिए एजेंसी नियुक्त की है और आरबीआई को भी सूचित किया है।

इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने तुरंत सख्त रुख अपनाया। वित्त विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज के लिए डी-एम्पैनल कर दिया है। सभी विभागों, बोर्डों और निगमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 31 मार्च 2026 तक इन निजी बैंकों में संचालित सरकारी खातों को बंद कर लें और जमा राशि निकाल लें। भविष्य में सरकारी खाते केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खोले जाएंगे।

इस घोटाले के खुलासे के बाद IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई और वे 20% तक लुढ़ककर लोअर सर्किट में पहुंच गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बैंक की छवि पर असर डाल सकता है, हालांकि बैंक का दावा है कि यह घटना लोकलाइज्ड है और अन्य ग्राहकों या शाखाओं पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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