भारत को मिली विशेष राहत : ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी!
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया के युद्ध जैसी स्थिति में जहां अमेरिका, यूरोप और इजराइल से जुड़े जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लगे हुए हैं और कई टैंकर हमलों का शिकार हो रहे हैं, वहीं भारत की कूटनीति ने कमाल दिखाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई हालिया बातचीत (जो इस संकट के दौरान तीसरी बार हुई) के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की छूट प्रदान की है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इसके तहत कम से कम दो भारतीय टैंकर पुष्पक और परिमल सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर चुके हैं या गुजर रहे हैं। एक टैंकर मुंबई पोर्ट पहुंच भी चुका है। यह रास्ता दुनिया के कुल कच्चे तेल का करीब 20% और भारत के बड़े हिस्से के आयात के लिए अहम है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों है यह इतना अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान ने हाल के तनाव में घोषणा की थी कि बिना उसकी अनुमति के कोई जहाज गुजर नहीं सकेगा, और अमेरिका-इजराइल से जुड़े जहाजों पर हमले की चेतावनी दी थी। ऐसे में भारत को मिली यह अनुमति ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ी जीत मानी जा रही है।
ईरान की तरफ से मिश्रित संकेत
कुछ रिपोर्टों में ईरानी सूत्रों ने किसी विशेष “अनुमति” से इनकार किया है, लेकिन भारतीय सूत्रों और कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जयशंकर-अराघची वार्ता के बाद भारतीय जहाजों को सुरक्षित जाने दिया गया है। यह भारत की संतुलित विदेश नीति और ईरान के साथ मजबूत संबंधों का नतीजा माना जा रहा है।
यह खबर भारत के लिए ऊर्जा संकट के बीच बड़ी गुड न्यूज है, क्योंकि इससे तेल-गैस की आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम हुआ है और घरेलू बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।

















