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दुबई में युद्ध के साये में फँसा रांची का नवदंपति: शादी की खुशियां बदलीं खौफ में, आदिवासी दंपति का हेमंत सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार

दुबई में युद्ध के साये में फँसा रांची का नवदंपति: शादी की खुशियां बदलीं खौफ में, आदिवासी दंपति का हेमंत सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार

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रांची/दुबई | 5 मार्च  एक ओर जहां जीवन के नए सफर की शुरुआत के रंगीन सपने थे, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय युद्ध तनाव की काली छाया ने उन सपनों को डर और अनिश्चितता में बदल दिया है। रांची के रहने वाले और सेल (SAIL) में कार्यरत अधिकारी अतुल उरांव और उनकी नववधू डॉ. कंचन बाड़ा, इस वक्त खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुबई में फंसे हुए हैं।

हनीमून का सपना बना चिंता का सबब
बीते 22 फरवरी को रांची में आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ दोनों का विवाह संपन्न हुआ था। खुशियों और दुआओं के साथ यह जोड़ा 27 फरवरी को छुट्टियां बिताने दुबई रवाना हुआ था। उन्हें क्या पता था कि जिस खाड़ी देश की चमक वे देखने जा रहे हैं, वह अचानक रणक्षेत्र में तब्दील होने की कगार पर आ जाएगा। 4 मार्च को उनकी वापसी निर्धारित थी, लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों के पहिये थाम दिए हैं।

हम सुरक्षित हैं, पर अनिश्चितता भारी है

दुबई से संपर्क करने पर अतुल उरांव ने भावुक होते हुए कहा, “हम जीवन की नई शुरुआत का जश्न मनाने आए थे, लेकिन यहाँ पहुँचते ही हालात बदल गए। सड़कें सूनी हैं और उड़ानें रद्द होने की खबर ने हमें डरा दिया है।” वहीं, डॉ. कंचन बाड़ा ने बताया कि वातावरण सामान्य नहीं है और वे बस जल्द से जल्द अपने घर, अपने लोगों के बीच लौटना चाहते हैं।

रांची में परिजनों की थमी सांसें
रांची स्थित उनके घरों में उत्सव का माहौल अब प्रार्थनाओं में बदल गया है। माता-पिता की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिकी हैं और वे हर पल अपने बच्चों की सलामती की खबर का इंतजार कर रहे हैं। परिजनों ने राज्य और केंद्र सरकार से भावुक अपील की है कि उनके बच्चों को सुरक्षित वापस लाया जाए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मार्मिक अपील
इस संकट की घड़ी में नवदंपति और उनके परिवारों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

यह केवल एक दंपति की कहानी नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों भारतीयों की व्यथा है जो वैश्विक तनाव की वजह से विदेशों में फंसे हैं। अब सबकी उम्मीदें झारखंड सरकार और भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं।

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