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हिंडालको मुरी वर्क्स में अनुकंपा नियुक्ति  क्या सिर्फ दिखावा है ? : एक परिवार लगभग दो साल से कर रहा नौकरी पाने की जद्दोजहद , आर्थिक स्थिति भी बिगड़ी

हिंडालको मुरी वर्क्स में अनुकंपा नियुक्ति  क्या सिर्फ दिखावा है ? : एक परिवार लगभग दो साल से कर रहा नौकरी पाने की जद्दोजहद , आर्थिक स्थिति भी बिगड़ी

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रांची/मुरी, 29 अगस्त: झारखंड के मुरी में स्थित हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Hindalco Industries Limited) के मुरी वर्क्स एक बड़े विवाद के केंद्र में है। मामला सेवानिवृत्त कर्मचारी श्रीकांत महतो के पुत्र राजू महतो की अनुकंपा नियुक्ति (compassionate appointment) से जुड़ा है। अक्टूबर 2023 में कंपनी ने राजू को नौकरी का आश्वासन दिया था, लेकिन लगभग दो साल बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जिस कारण  एक परिवार की आर्थिक और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है । ऐसे में  हिंडाल्को के अनुकम्पा पर  नियुक्ति की  प्रणाली  सवालों के घेरें में है ।

अनुकंपा नियुक्ति की पुरानी परंपरा और वर्तमान चुनौतियां

हिंडालको मुरी वर्क्स, जो भारत का पहला एल्यूमिना रिफाइनरी है और 1948 से संचालित हो रहा है, में दशकों से यह प्रथा चली आ रही है कि सेवानिवृत्त या दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों को अनुकंपा आधार पर या एग्रीमेंट के तहत नौकरी दी जाती है। इसका उद्देश्य परिवार की आजीविका को सुरक्षित रखना होता है। श्रीकांत महतो के परिवार ने भी इसी उम्मीद पर भरोसा किया। सेवानिवृत्ति के समय कंपनी ने राजू महतो को नौकरी का वादा किया, और जुलाई 2024 तक राजू ने सभी आवश्यक दस्तावेज, जैसे विभागीय कागजात, पुलिस सत्यापन और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर दीं।

बताया जाता है की कंपनी की ओर से बार-बार नए दस्तावेजों की मांग की गई, और परिवार ने सारे डॉक्युमेंट  पहुचाया ,

वैसे श्रम कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल मकसद परिवार को संकट से बचाना है, लेकिन यदि प्रक्रिया सालों तक अटकी रहे, तो यह नीति का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।

परिवार पर मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव

लगभग दो वर्षों की इस टलमटोल ने श्रीकांत महतो के परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। राजू महतो, जो एक शिक्षित युवा हैं, ने बताया, “पिछले दो साल से हम मानसिक तनाव और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। कंपनी हमें बार-बार नए कागजातों के लिए दौड़ाती है, जो अपमानजनक है। इससे हमारा सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।” परिवार का कहना है कि यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन रहा है, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी चोट पहुंचा रहा है।

वर्तमान में, 2025 तक पहुंच चुके इस मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। बताया जाता है की कंपनी के एचआर विभाग ने हाल ही में राजू को बुलाकर “बॉम्बे कॉर्पोरेट ऑफिस” से बातचीत का आश्वासन दिया, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थानीय नियुक्तियों में कॉर्पोरेट स्तर की कोई भूमिका नहीं होती। हिंडालको प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है,

राजनीतिक दबाव और श्रमिक असंतोष के आरोप

सूत्रों के अनुसार, मुरी प्रबंधन एक राजनीतिक दल के प्रभाव में काम कर रहा है। आरोप है कि उसी दल के प्रमुख की सहमति के बिना कोई नियुक्ति नहीं होती। विशेष रूप से, यह दावा किया जा रहा है कि राजू महतो को नौकरी न देने के पीछे राजनीतिक कारण हैं,

कर्मचारियों के बीच इस मामले की चर्चा तेज है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो यह श्रमिक संगठनों और स्थानीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। JKLM सुप्रीमो और डुमरी विधायक ने पहले ही प्रबंधन को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए, और किसी परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

कंपनी की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं

हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड, जो अदित्य बिड़ला ग्रुप की प्रमुख कंपनी है, ने इस विवाद पर अब तक चुप्पी साध रखी है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और हालिया वार्षिक रिपोर्ट (2023-24) में श्रमिक कल्याण नीतियों का उल्लेख है, लेकिन विशिष्ट मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

ऐसे में यह मामला केवल एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र में अनुकंपा नियुक्ति प्रणाली की कमियों को उजागर करता है। अब सभी की निगाहें हिंडालको प्रबंधन पर हैं कि वे क्या कदम उठाते हैं। यदि न्याय नहीं मिला, तो यह मुद्दा अदालतों तक जायेगा ?  फफ़िलहाल परिवार उम्मीद कर रहा हैं कि जल्द ही इस विवाद का समाधान हो और राजू महतो को उनका हक मिले।

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