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झारखंड स्थापना दिवस : लालू प्रसाद यादव की भूमिका को स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करने की मांग

रांची : झारखंड के आगामी 25वें स्थापना दिवस (15 नवंबर 2025) को लेकर प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य के नामकरण और निर्माण में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की अहम भूमिका को इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में सदैव दर्ज किया जाना चाहिए।

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यादव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि विगत छह वर्षों से राज्य में दूसरी बार जनाकांक्षाओं को पूरा करने वाली महागठबंधन सरकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में संचालित हो रही है, जिसमें राजद एक मजबूत सहयोगी दल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

लंबे संघर्ष के बाद झारखंड का निर्माण

कैलाश यादव ने याद दिलाया कि लंबे संघर्षों के बाद 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का निर्माण हुआ। अलग राज्य की मांग में प्रमुख पार्टियों के अलावा अनेक राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और आंदोलनकारी साथियों का योगदान रहा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कभी झारखंड नामकरण के पक्ष में नहीं रही और हमेशा ‘वनांचल’ नाम की मांग करती रही।

1990 में लालू के मुख्यमंत्री बनने से बढ़ा मनोबल

यादव ने कहा कि 1990 में जब लालू प्रसाद यादव एकीकृत बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो वर्तमान झारखंड के आंदोलनकारियों का मनोबल काफी बढ़ गया। लालूजी एक संघर्षशील, कर्मठ, प्रखर समाजवादी और सेक्युलर नेता के रूप में उभरे। वे सामाजिक न्याय के प्रतीक थे और दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, आदिवासी तथा वंचित वर्गों के हक-अधिकारों के लिए सदैव लड़ते रहे। अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्होंने इन वर्गों को अधिकार और सम्मान दिलाया।

1995 में जैक का गठन : निर्णायक कदम

झारखंड अलग राज्य की मांग दिन-प्रतिदिन जोर पकड़ रही थी। शिबू सोरेन (गुरुजी) की अगुवाई में विभिन्न नेताओं ने जनआंदोलन चलाए और बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को इसकी जानकारी दी।

वर्ष 1995 में एकीकृत बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने आंदोलन का समर्थन करते हुए झारखंड स्वायत्त परिषद (जैक) का गठन किया। आंदोलन को निर्णायक रूप देने के लिए शिबू सोरेन को अध्यक्ष और सूरज मंडल को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। जैक की यह पहल अलग राज्य गठन की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई, जिसके फलस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य अस्तित्व में आया।

भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप

यादव ने कहा कि लालूजी को आशंका थी कि केंद्र की तत्कालीन भाजपाई एनडीए सरकार राज्य बनने के बाद आदिवासी और वंचित वर्गों के साथ दोहरापन कर सकती है। ऐसा ही हुआ भी झारखंड के 25 वर्षों में लगभग 13 बार सत्ता हस्तांतरण हुआ। भाजपा ने कभी झारखंड नाम का समर्थन नहीं किया; तत्कालीन बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और केंद्र की बाजपेयी सरकार ‘वनांचल’ के पक्षधर रहे। लेकिन बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नेतृत्व में झारखंड नाम से ही राज्य का नामकरण हुआ।

राजद की अपील : लालू को उचित सम्मान

राजद प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि झारखंड निर्माण में गुरुजी को जैक अध्यक्ष के रूप में शासकीय, प्रशासनिक और सेक्युलर राजनीतिक मजबूती प्रदान करने में लालू प्रसाद यादव का मजबूत साथ रहा। इसलिए राज्य के स्थापना दिवस पर उन्हें इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में उचित सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए।

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