मामा को बचाने दिल्ली जा रहे थे, लेकिन… चतरा के सिमरिया में एयर एंबुलेंस क्रैश, सिमडेगा में शोक की लहर
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : एक ऐसा युवक जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहता था, आज उसी मानव सेवा के रास्ते में अपनी जान गंवा बैठा। सिमडेगा जिले के ध्रुव कुमार की चतरा जिले के सिमरिया इलाके में सोमवार शाम हुए एयर एंबुलेंस विमान हादसे में मौत हो गई। इस हादसे में कुल 7 लोगों की जान गई, जिसमें ध्रुव के साथ मरीज, उनकी पत्नी, डॉक्टर, पैरामेडिक और दो पायलट शामिल थे।
ध्रुव कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उनके पिता एक राशन दुकान में मजदूरी करते हैं। ध्रुव ने हाल ही में अपनी बहन शैली कुमारी की जान बचाने के लिए करीब 100 दिनों तक अस्पताल में संघर्ष किया था। बहन की रिकवरी के बाद उन्होंने ‘शैली फाउंडेशन’ की स्थापना की और लगातार जरूरतमंदों की मदद करते रहे। वह मोबाइल इंजीनियरिंग सीखने के लिए दिल्ली जाने वाले थे – टिकट भी बुक हो चुकी थी – लेकिन मामा संजय कुमार की बुरी हालत ने उन्हें रोक लिया।
संजय कुमार (चंदवा में पेट्रोल पंप व्यवसायी) एक हादसे में 80% तक झुलस गए थे। उनका इलाज रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था। ध्रुव सोमवार सुबह सिमडेगा से रांची पहुंचे, मामा की नाजुक स्थिति देखकर उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के मेदांता अस्पताल ले जाने का फैसला किया। शाम करीब 7:11 बजे रांची से दिल्ली के लिए एयर एंबुलेंस (Redbird Airways Beechcraft C90) उड़ी, लेकिन खराब मौसम के कारण मात्र 23 मिनट बाद ही चतरा के सिमरिया ब्लॉक के कसरिया पंचायत के जंगल में क्रैश हो गई। विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया और सभी सवारों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की खबर जैसे ही सिमडेगा पहुंची, पूरा परिवार रोने-धोने लगा। ध्रुव के परिजन आनन-फानन में सिमरिया के लिए रवाना हो गए। सिमडेगा शहर और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। लोग कह रहे हैं – “ध्रुव कभी किसी की मदद से पीछे नहीं हटा, लेकिन आज नियति ने उसे हमसे छीन लिया।”
ध्रुव कुमार अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि मानवता और परिवार के प्रति समर्पण की मिसाल बन गए हैं। उनका जाना न सिर्फ परिवार के लिए, बल्कि पूरे सिमडेगा के लिए अपूरणीय क्षति है।
















