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झारखंड में डीएमएफटी फंड घोटाले का सनसनीखेज खुलासा, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को बताया ‘सरगना, तत्कालीन DC विजया जाधव की बढ़ सकती है मुश्किलें ।

झारखंड में डीएमएफटी फंड घोटाले का सनसनीखेज खुलासा, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को बताया ‘सरगना, तत्कालीन DC विजया जाधव की बढ़ सकती है मुश्किलें ।

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रांची, 8 सितंबर : झारखंड में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर इस घोटाले का ‘सरगना’ होने का गंभीर आरोप लगाया है। रांची में आयोजित एक प्रेस वार्ता में मरांडी ने दावा किया कि डीएमएफटी फंड को मुख्यमंत्री ने अपना ‘एटीएम’ बना लिया है और लूट का पैसा उनकी तिजोरी में जा रहा है।

बोकारो में 631 करोड़ की लूट का दावा

मरांडी ने बोकारो जिले को उदाहरण बनाते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में जिले को मिले 631 करोड़ रुपये के डीएमएफटी फंड में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने कई परियोजनाओं में लूट के सबूत पेश किए, जिनमें शामिल हैं:
– 46 पंचायतों में जेनरेटर की आपूर्ति , मरांडी के अनुसार एक 15 kb का 35 जेनरेटर 797526 में खरीदे गए जबकि बाजार मूल्य 3 से 4 लाख रुपये है
– 1666 आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल मैट्स की खरीद करीबन एक लाख 25 हजार में खरीदे गए जबकि इसका बाजार मूल्य 3 से 7 हजार रुपये है इस मद में 19 करोड़ का भुगतान हुआ है

– स्कूलों में टैब लैब और मॉड्यूलर किचन का निर्माण में 5 टेंडर हुए और सभी टेंडर 69 लाख से 73 लाख के बीच हुए जबकि एक मॉडलर किचन बनाने में 6 से 8 लाख रुपये खर्च आता है

– 187 हाई मास्ट लाइट्स, सौर ऊर्जा पंपसेट और एलईडी वैन की खरीद , एक हाई मास्क लाइट करीबन 7 लाख 30 हजार में लगाया गया जबकि बाजार में कीमत दो से ढाई लाख रुपये है।

– सरकारी भवनों में तड़ित चालक और बाला पेंटिंग 222 स्कूल के वाल पेंटिंग में 39 करोड़ 326 लाख का भुगतान किया गया जबकि एक स्कूल के वाल पेंटिंग में 40 से 42 हजार रुपये खर्च आता है ।
– जबकि 98 सौर ऊर्जा संचालित पम्प सात लाख से 9 नौ लाख के बीच ख़रीदे गए जबकि बाजार कीमत डेढ़ लाख से दो लाख के बीच है । इसमें 13 करोड़ का भुगतान हुआ है।

– जबकि सात स्कूलों लैब टैब 8 लाख की दर से खरीदे गए जबकि मार्केट में कीमत दो लाख 32 हजार के आसपास है

सबसे बड़ी बात यह है कि मरांडी ने कहा कि जिस वक्त यह घोटाला हुआ उसे वक्त बोकारो की तत्कालीन डीसी विजया जाधव थी।

मरांडी ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं में निविदाओं को बार-बार निकाला गया और बाजार दर से 10 गुना अधिक कीमत पर सामग्री आपूर्ति दिखाकर भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि यह लूट केवल बोकारो तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई है।

सीबीआई जांच की सिफारिश करें हेमंत

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चुनौती दी कि यदि वे निर्दोष हैं, तो डीएमएफटी घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश करें। उन्होंने कहा, “यह घोटाला इतना बड़ा है कि कोई अधिकारी बिना उच्चस्तरीय संरक्षण के इतना बेखौफ नहीं हो सकता। यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर हुआ है।” मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार की जांच एजेंसियां इस मामले में निष्पक्ष नहीं हो सकतीं, क्योंकि सरकार खुद इसमें संलिप्त है।

प्रधानमंत्री की कल्याणकारी योजना की लूट

मरांडी ने कहा कि डीएमएफटी फंड की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खनन क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए की थी। लेकिन झारखंड में इस कल्याणकारी योजना को धरातल पर उतारने के बजाय, इसका पैसा लूटा जा रहा है।

सामाजिक संगठनों को धमकी, भाजपा लड़ेगी लड़ाई

मरांडी ने बताया कि सामाजिक संगठनों को इस घोटाले के खिलाफ सूचना मांगने पर धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों के साथ खड़ी है और इस मामले को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार सीबीआई जांच के लिए कदम नहीं उठाती, तो केंद्र सरकार इसकी जांच कराने में सक्षम है।

हजारों करोड़ की लूट का खुलासा जल्द

मरांडी ने आंकड़ों के साथ पत्रकारों को जानकारी दी और दावा किया कि पूरे राज्य में हजारों करोड़ रुपये की लूट हुई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही अन्य जिलों में भी इस तरह की अनियमितताओं का खुलासा किया जाएगा।

यह घोटाला झारखंड की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि भाजपा ने इसे लेकर राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस मामले में सरकार और मुख्यमंत्री क्या जवाब देते हैं।

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