लापरवाही की मार: 2 साल बाद भी अधूरी पड़ी ग्रामीण सड़क, जनता परेशान
शंभू कुमार सिंह/ राकेश
सिमडेगा/कुरडेग : मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत झिरकामुंडा परकला से खिंडा झुनकाछापर होते हुए ढोढ़ी तक करीब 8 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य अब लोगों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। सड़क का उद्घाटन 16 मार्च 2024 को हो चुका था, लेकिन लगभग दो साल बीत जाने के बावजूद कालीकरण (बिटुमिनाइजेशन) का काम अधूरा पड़ा है। पुराने पथ को उखाड़कर मेटलिंग तो कर दी गई, लेकिन कई जगहों पर सड़क पूरी तरह खोदकर छोड़ दी गई है, तो कहीं सिर्फ गिट्टी बिछाकर काम रोक दिया गया।
इस अधूरी सड़क के कारण ग्रामीणों का दैनिक जीवन बेहद कष्टदायक हो गया है। बड़े-बड़े गड्ढे, बिखरी ढीली गिट्टी और दिनभर उड़ती धूल ने मार्ग को खतरनाक बना दिया है। दोपहिया वाहनों के चालक लगातार फिसलन का शिकार हो रहे हैं, कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और ग्रामीणों को चोटें आई हैं।
यह सड़क कई गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, जहां से रोजाना सैकड़ों ग्रामीण, किसान, मजदूर, स्कूली बच्चे, शिक्षक और मरीज गुजरते हैं। स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है – धूल से उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। बुजुर्गों और बीमारों के लिए तो यह रास्ता और भी मुश्किल भरा है। आपात स्थिति में एंबुलेंस का पहुंचना भी जोखिम भरा हो सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार (संवेदक) द्वारा लापरवाही बरती जा रही है और कार्य समय पर पूरा नहीं किया जा रहा। इससे पहले भी प्रखंड विकास पदाधिकारी, कुरडेग को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और यदि जल्द काम पूरा नहीं हुआ तो सामूहिक आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है।
ग्रामीणों की मांग है – अविलंब जांच हो, दोषी संवेदक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण शीघ्र पूरा कराया जाए। जब योजना जनता की सुविधा के लिए है, तो जनता ही क्यों परेशान हो रही है? प्रशासन को समय रहते हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान करना चाहिए, वरना यह सड़क लापरवाही की एक और मिसाल बन जाएगी।


















