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रांची में डिजिटल लोन के दबाव ने छीनी एक और जिंदगी ! छिपा समाज के लिए सबक

रांची में डिजिटल लोन के दबाव ने छीनी एक और जिंदगी ! छिपा समाज के लिए सबक

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रांची : पूरे देश मे इनदिनों डिजिटल लोन एप्प की भरमार हो गयी है । हर किसी के मोबाइल में एक फ़ोन आता है और बताया जाता है की आप इतने लोन के लीजिये बिना कोई कागज के बिना परेशानी के ।  और लोग खुशी खुशी लोन ले भी लेते है । मगर इसके बाद की कहानी क्या होती है रिकवरी एजेंट कैसे परेशान करते है आप नही जानते है तो आज रांची के ऐसे ही डिजिटल लोन की कहानी हम आपको बताते है और रिकवरी एजेंट की धमकियों के बाद क्या हुआ यह भी बताते है

झारखंड की राजधानी रांची के करमटोली इलाके में डिजिटल लोन के बाद  एक  घटना ने समाज को फिर से कर्ज के जाल और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही के खतरों की याद दिलाई। रामगढ़ निवासी 24 वर्षीय जय गोस्वामी ने बुधवार को अपने किराए के कमरे में रस्सी से झूलकर लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस को मौके से मिले तीन पन्नों के सुसाइड नोट ने एक ऐसी सच्चाई उजागर की, जो आज के डिजिटल युग में कई युवाओं की जिंदगी को प्रभावित कर रही है।

जय, जो एक लगेज कंपनी में कर्मचारी थे, ने अपने सुसाइड नोट में ऑनलाइन लोन ऐप्स से लिए गए कर्ज और रिकवरी एजेंट्स की ओर से मिल रही धमकियों का जिक्र किया। नोट के अनुसार, जय ने एक मोबाइल ऐप से 2 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसे उन्होंने पूरा चुका दिया था। इसके बावजूद, रिकवरी एजेंट्स की ओर से लगातार व्हाट्सऐप कॉल्स और जेल भेजने की धमकियाँ उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रही थीं। नोट में जय ने अपने माता-पिता से भावुक माफी माँगते हुए लिखा, “मैं अच्छा बेटा नहीं बन सका।” यह पंक्ति न केवल उनके दर्द को दर्शाती है, बल्कि समाज में बढ़ते वित्तीय दबाव और भावनात्मक अकेलेपन की बानगी है

कर्ज का जाल और डिजिटल युग की चुनौतियाँ

आज के दौर में ऑनलाइन लोन ऐप्स की आसान उपलब्धता ने कई लोगों को तुरंत कर्ज लेने के लिए प्रेरित किया है, लेकिन इसके पीछे छिपे खतरे अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। उच्च ब्याज दरें, छिपे हुए शुल्क और रिकवरी एजेंट्स की आक्रामक रणनीतियाँ कर्जदारों को मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर कर रही हैं। जय की कहानी उन हजारों युवाओं की कहानी का हिस्सा है, जो कर्ज के इस चक्रव्यूह में फँस रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और जाँच
करमटोली पुलिस ने घटनास्थल से शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अब इस मामले में लोन ऐप और रिकवरी एजेंट्स की भूमिका की जाँच कर रही है। यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे ऐप्स के खिलाफ कड़े नियम लागू करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

समाज के लिए एक चेतावनी
जय की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय तनाव पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज लेने से पहले उसकी शर्तों को समझना, वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना और जरूरत पड़ने पर परामर्श लेना जरूरी है।

जाहिर है समाज मे हर व्यक्ति का कर्तव्य है की कर्ज का बोझ और सामाजिक दबाव किसी की जिंदगी का अंत नहीं होने देना चाहिए। इसके लिए कम से कम अपने आसपास के लोगो से मिलते जुलते रहे और अपना दुख सुख समाज मे बांटा करे । ना की मोबाइल और इंटरनेट की ख्याली दुनिया में जिया जाए।

 

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