खरसावां शहीद दिवस: ग्रामीणों ने 1948 गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, 

खरसावां शहीद दिवस: ग्रामीणों ने 1948 गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, 

खरसावां शहीद दिवस: ग्रामीणों ने 1948 गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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खरसावां शहीद दिवस: ग्रामीणों ने 1948 गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, 

सरायकेला-खरसावां, 1 जनवरी 2026: एक तरफ जहां पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा है, वहीं झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में स्थित खरसावां शहीद स्थल पर आज हजारों लोगों का हुजूम उमड़ा। स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक खरसावां गोलीकांड की 78वीं बरसी पर आदिवासी समुदाय ने अपने पूर्वजों को याद किया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। सुबह से ही झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए हजारों आदिवासी शहीद स्थल पर जुटे और शहीदों की स्मृति में प्रार्थना की।श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद लोगो ने कहा, “हम उन शहीदों को नमन कर रहे हैं जिन्होंने अपनी पहचान बचाने के लिए बलिदान दिया। खरसावां झारखंड का ऐतिहासिक स्थल है, यहां आदिवासी अधिकारों की लड़ाई की गाथा लिखी गई है। हमारे पूर्वजों ने जब देश आजाद होने का सपना भी नहीं देखा था, तब से वे प्रकृति और अपनी जमीन-जंगल की रक्षा कर रहे थे।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1 जनवरी 1948 को खरसावां रियासत को ओडिशा में विलय के विरोध और अलग आदिवासी राज्य की मांग को लेकर बड़ी सभा हुई थी। मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा मुख्य अतिथि थे, लेकिन वे नहीं पहुंच सके। शांतिपूर्ण भीड़ पर तत्कालीन ओडिशा पुलिस ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें सैकड़ों (कुछ अनुमानों में हजारों) आदिवासी शहीद हो गए। इसे ‘स्वतंत्र भारत का जलियांवाला बाग’ कहा जाता है। मृतकों की सटीक संख्या आज भी विवादास्पद है।इस घटना के बाद खरसावां और सरायकेला का ओडिशा में विलय रुक गया और ये क्षेत्र अंततः झारखंड का हिस्सा बने। हर साल 1 जनवरी को यहां शहीद दिवस मनाया जाता है। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी।

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