रांची: चुटिया के श्री राम मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में गूंजा सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति का संकल्प
रांची: चुटिया के श्री राम मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में गूंजा सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति का संकल्प
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रांची (चुटिया): राजधानी के श्रीराम नगर, चुटिया स्थित ऐतिहासिक श्री राम मंदिर परिसर में ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। श्रद्धा और उत्साह से सराबोर इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना रहा।
कलश यात्रा और संतों का भव्य स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ चुटिया राम मंदिर प्रांगण से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। इसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया। शोभा यात्रा के दौरान अयोध्या के हनुमान गढ़ी के महंत श्री राजू दास जी और राम मंदिर के महंत जी को फूलों से सजे रथ पर बैठाकर गाजे-बाजे के साथ आयोजन स्थल तक लाया गया। पूरा क्षेत्र ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
एकता ही समाज की वास्तविक शक्ति: महंत
वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्री राम मंदिर, चुटिया के महंत ने अपने संबोधन में ऋग्वेद के मंत्र “संगच्छध्वं संवदध्वं” का उल्लेख करते हुए कहा कि साथ चलना और एक लक्ष्य के लिए संगठित होना ही समाज की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनौतियों के बीच सनातन समाज का संगठित होना समय की मांग है।
सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक है राम मंदिर: महंत राजू दास
अयोध्या से पधारे महंत श्री राजू दास जी ने अपने ओजस्वी भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“पिछले 100 वर्षों से संघ राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए कार्य कर रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक स्वाभिमान की विजय है।”
उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश के एक लाख गाँवों में ऐसे सम्मेलन आयोजित कर करोड़ों लोगों को जोड़ा जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी पहचान और परंपराओं पर गर्व कर सकें।
बिखराव पराजय और एकता विजय का मार्ग: आलोक जी
संघ के सह-सरकार्यवाह आलोक जी ने संगठन की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि विविधता हमारी समृद्धि है, लेकिन समाज को एक नाम और एक उद्देश्य के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने सामाजिक समरसता पर विशेष जोर देते हुए छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने संत रविदास, मीराबाई और महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में जन्म नहीं, बल्कि कर्म और भक्ति श्रेष्ठ है।
पंच परिवर्तन और पर्यावरण की चिंता
आलोक जी ने समाज के सामने ‘पंच परिवर्तन’ का रोडमैप रखा, जिसमें शामिल हैं:
* सामाजिक समरसता
* परिवार प्रबोधन (संस्कार युक्त परिवार)
* पर्यावरण संरक्षण
* स्वदेशी का भाव
* नागरिक कर्तव्य
उन्होंने विशेष रूप से रांची की गिरती वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण की अपील की।
लघु नाटिकाओं ने जीता दिल
सम्मेलन के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सबका ध्यान खींचा। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और ‘लव जेहाद’ जैसे विषयों पर आधारित लघु नाटिकाओं के माध्यम से समाज को जागरूक किया गया।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
कार्यक्रम में गिरधारीलाल महतो, विशाल जी, गोपाल शर्मा, मिथिलेश्वर मिश्र, अशोक प्रधान, विभाग प्रचारक मंटू जी सहित गायत्री परिवार, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच के अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत और सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

















