वृंदावन वाले प्रेमानंद जी महाराज का क्या है असली नाम, मात्र 13 वर्ष की आयु में घर त्यागकर अपनाया संन्यास का मार्ग
वृंदावन : राधा रानी के परम भक्त और वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज (जिन्हें प्रेमानंद जी महाराज के नाम से जाना जाता है) का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही भक्ति और आध्यात्मिकता की ओर गहरा झुकाव रखने वाले प्रेमानंद जी महाराज ने मात्र 13 वर्ष की आयु में घर त्याग दिया और संन्यास दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक पथ पर चल पड़े।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रेमानंद जी महाराज का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां भक्ति का वातावरण था। उनके पिता श्री शंभू पांडे और माता श्रीमती रामा देवी धार्मिक प्रवृत्ति के थे। बचपन में ही उन्होंने हनुमान चालीसा और गीता का पाठ शुरू कर दिया था। स्कूल में पढ़ते हुए वे भौतिकवादी ज्ञान पर सवाल उठाते थे और ईश्वर प्राप्ति की खोज में लगे रहते थे। नौवीं कक्षा तक पहुंचते-पहंचते उन्होंने संन्यास लेने का संकल्प ले लिया। एक रात वे चुपके से घर छोड़कर वाराणसी पहुंच गए और गंगा किनारे कठोर तपस्या शुरू कर दी।
वाराणसी में उन्होंने नैष्ठिक ब्रह्मचर्य अपनाया और उस समय उन्हें ‘आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी’ के नाम से जाना जाता था। बाद में एक संत के आमंत्रण पर रासलीला देखने वृंदावन आए और यहां की दिव्य लीला ने उनके हृदय को मोह लिया। वे स्थायी रूप से वृंदावन में बस गए और राधा वल्लभ संप्रदाय में दीक्षा ली। उनके गुरु पूज्य श्री हित गौरांगी शरण जी महाराज ने उन्हें ‘निज मंत्र’ प्रदान किया, जिससे वे सहचरी भाव और नित्य विहार रस के रसिक संत बने। दीक्षा के बाद उनका नाम प्रेमानंद गोविंद शरण पड़ा।
आज प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में निवास करते हैं। उनके सत्संग, भजन और एकांतिक वार्तालाप लाखों भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर प्रेरित करते हैं। विराट कोहली-अनुष्का शर्मा से लेकर आमजन तक उनके भक्त हैं। उनकी शिक्षाएं सरलता, प्रेम और राधा-कृष्ण भक्ति पर केंद्रित हैं।
प्रेमानंद जी महाराज की जीवन यात्रा त्याग, तपस्या और अटूट भक्ति की मिसाल है, जो युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है।

















