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नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा: मां की उपासना कर पाएं अपार ऊर्जा और बुद्धि का आशीर्वाद

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नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है, जिन्होंने अपनी सूक्ष्म मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इस दिन भक्त मां की उपासना कर अपार ऊर्जा, बुद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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मां कूष्मांडा का स्वरूप सूर्य के समान तेजस्वी है। मान्यता है कि उनकी पूजा से भक्तों के सभी रोग-दोष दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। मां का यह स्वरूप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और बुद्धि को प्रखर बनाता है।

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चौथे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां कूष्मांडा को लाल फूल, कुमकुम, और मालपुए का भोग अर्पित करें। मां के मंत्र “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” का जाप करें। पूजा में कद्दू (पेठा) का विशेष महत्व है, क्योंकि मां को कद्दू अति प्रिय है।

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मां कूष्मांडा की साधना से भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और जीवन में उत्साह व आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो बौद्धिक कार्यों, नौकरी, या व्यवसाय में सफलता चाहते हैं।

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इस नवरात्रि मां कूष्मांडा की कृपा से अपने जीवन को ऊर्जा और बुद्धि के प्रकाश से भरें। मां की भक्ति में लीन होकर उनके आशीर्वाद को प्राप्त करें और अपने लक्ष्यों को सिद्ध करें।

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