कौन संभालेगा अजित पवार की विरासत? पार्टी में मंथन शुरू, रेस में ये दो नाम सबसे आगे !
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बारामती में विमान दुर्घटना में निधन के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। 28 जनवरी को मुंबई से बारामती जा रहे उनके Learjet 45 विमान के लैंडिंग के दौरान क्रैश होने से अजित पवार सहित विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि बारामती विधानसभा सीट को भी खाली कर दिया है, जहां अजित पवार लंबे समय से मजबूत पकड़ रखते थे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अब एनसीपी (अजित पवार गुट) में इस बात पर गहन मंथन चल रहा है कि “अजित दादा” की राजनीतिक विरासत और बारामती की सीट को कौन संभालेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता इस उत्तराधिकार को लेकर चर्चा में जुटे हैं, क्योंकि बारामती एनसीपी का गढ़ माना जाता है और यहां से कोई भी उम्मीदवार मजबूत स्थिति में चुनाव लड़ सकता है।
सबसे आगे चल रहे दो प्रमुख दावेदार
सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी)
वर्तमान में राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें अजित पवार का प्राकृतिक उत्तराधिकारी बताते हुए उनका नाम आगे किया है। कुछ सूत्रों के अनुसार, एनसीपी ने सुनेत्रा पवार को ही चुन लिया है और उन्हें उपमुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्ताव भी सौंपा जा सकता है। यदि वे डिप्टी सीएम बनती हैं, तो बारामती से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बनना लगभग तय माना जा रहा है। सुनेत्रा पवार पहले भी राजनीतिक सक्रिय रही हैं और परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम दिख रही हैं।
पार्थ पवार (अजित पवार के ज्येष्ठ पुत्र)
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार भी रेस में प्रमुखता से शामिल हैं। युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए पार्थ को पार्टी के कई कार्यकर्ता बारामती की जिम्मेदारी सौंपने के पक्ष में हैं। पार्थ पहले भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और परिवार की राजनीतिक छवि को बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, सुनेत्रा पवार की तुलना में उनका अनुभव कम होने की वजह से चर्चा में थोड़ा पीछे दिख रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, फैसला जल्द ही लिया जा सकता है, क्योंकि बारामती सीट पर उपचुनाव की घोषणा होने वाली है और एनसीपी नहीं चाहेगी कि यह सीट कमजोर पड़े। इस बीच, शरद पवार गुट और अन्य विपक्षी दलों की नजर भी इस सीट पर टिकी है, लेकिन अजित गुट की मजबूत पकड़ को देखते हुए परिवार से ही कोई उम्मीदवार उतारना सबसे संभावित लग रहा है।
अजित पवार की अचानक विदाई ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा किया है। अब देखना यह है कि उनकी विरासत को कौन संभालता है और बारामती का “दादा” कौन बनता है।

















