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भारत और यूरोपीय संघ के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पूरी! 18 साल बाद मुक्त व्यापार समझौते पर लगी मुहर

नई दिल्ली : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत आखिरकार सफल हो गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक समझौता अब फाइनल हो चुका है। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के नाम से भी जाना जा रहा है, क्योंकि यह भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक के साथ व्यापक आर्थिक एकीकरण का रास्ता खोलेगा।

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18 साल की लंबी प्रक्रिया का अंत

यह समझौता 2007 में शुरू हुई बातचीत का नतीजा है, जो कई बार रुकी और फिर 2022 में दोबारा शुरू हुई। अब दोनों पक्षों ने सभी मुद्दों पर सहमति जता ली है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, “यह एक संतुलित और भविष्योन्मुखी समझौता है, जो भारत और EU के बीच व्यापार एवं निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”

मुख्य बातें और प्रभाव

औपचारिक घोषणा: मंगलवार (27 जनवरी 2026) को इस समझौते की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
हस्ताक्षर: कानूनी समीक्षा (legal scrubbing) और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अंतिम हस्ताक्षर होंगे।
व्यापार वृद्धि: वर्तमान में भारत-EU का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136-140 अरब डॉलर के आसपास है। यह समझौता टैरिफ कम करने, सेवाओं, निवेश और डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने से इसे कई गुना बढ़ा सकता है।
उपभोक्ताओं को फायदा: लग्जरी कारें (जैसे BMW, Mercedes), वाइन, चॉकलेट और अन्य यूरोपीय उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, क्योंकि भारत ने कुछ कारों पर टैरिफ 110% से घटाकर 40% करने पर सहमति जताई है।
भारतीय निर्यातकों को लाभ: कपड़ा, फार्मा, आईटी सेवाएं, कृषि उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।

वैश्विक संदर्भ में महत्व

यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार में बदलाव हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत को अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के बीच मजबूत वैकल्पिक साझेदार बनाएगा और ‘मेक इन इंडिया’ तथा आत्मनिर्भर भारत को नई गति देगा।

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