सिमडेगा नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव में निर्दलीय ओलिवर लकड़ा की शानदार जीत ने भाजपा और कांग्रेस को गहरा झटका दिया
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ओलिवर लकड़ा ने जीत हासिल कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। री-काउंटिंग के बाद घोषित परिणामों में ओलिवर लकड़ा ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अनिल तिर्की को 172 वोटों से हराया। ओलिवर को कुल 4,691 वोट मिले, जबकि अनिल तिर्की को 4,519 वोट प्राप्त हुए। अन्य उम्मीदवारों में फुल सुंदरी देवी को 3,620, रामबिलास बड़ाइक को 2,887 और सेराफिनुस कुल्लू को 1,684 वोट मिले।
यह जीत बड़े राजनीतिक दलों के लिए करारा झटका साबित हुई है भाजपा ने नए जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज कर गलत उम्मीदवार चयन की वजह से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। इससे पार्टी की साख को गहरा नुकसान पहुंचा है और आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर पड़ सकता है।
इसी तरह कांग्रेस को भी बड़ा धक्का लगा, जहां जिला अध्यक्ष की अगुवाई में लड़ा गया यह पहला प्रमुख चुनाव करारी हार में तब्दील हो गया। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की हार संगठन के लिए बड़ा झटका है, जो आने वाले समय में पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर सकती है।
वहीं, झामुमो के लिए यह परिणाम उत्साहवर्धक रहा। पार्टी के उम्मीदवार भले ही हार गए, लेकिन कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जोश भर गया है। जिला सचिव की सक्रिय भागीदारी और रणनीति ने पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। अगर झामुमो यह उत्साह विधानसभा चुनाव तक बनाए रखे, तो बड़ा उलटफेर संभव है।
ओलिवर लकड़ा की जीत ईमानदारी, कड़ी मेहनत और निस्वार्थ समाज सेवा का संदेश देती है। इसी तरह वार्ड 17 के उम्मीदवार चंदन डे ने भी 20 वर्षों की निरंतर समाज सेवा का फल पाकर जीत दर्ज की, जो अन्य उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है।
मतदाताओं ने साफ संकेत दिया है कि काम नाम से नहीं, बल्कि पूजा (समर्पण) से होती है। यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए सबक है कि जनता अब सिर्फ पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार के कार्य और ईमानदारी पर वोट देती है।
















