सिमडेगा नगर परिषद चुनाव: वार्डों में कांटे की टक्कर, अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला, जीत किस्मत पर टिकी
शंभू कुमार सिंह
सिमडेगा : सिमडेगा नगर परिषद के आम चुनाव इन दिनों जोरों पर हैं। कुल 30,972 मतदाताओं (14,891 पुरुष और 16,081 महिला) वाले इस क्षेत्र में 20 वार्डों के लिए मतदान की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मतदान 23 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा, और पोलिंग पार्टियां पहले ही बूथों की ओर रवाना हो चुकी हैं।
अध्यक्ष पद के लिए आठ प्रत्याशी मैदान में हैं, जिसमें फुलसुंदरी देवी, पुष्पा कुल्लू, अनिल तिर्की, सेराफिनुस कुल्लू, ओलिभर लकड़ा, मंजु लकड़ा, डॉ. एडविन जोन बिलंग और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं। यह चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया है, जहां जीत न सिर्फ संगठन और रणनीति पर, बल्कि किस्मत पर भी निर्भर करेगी।
कांग्रेस में आंतरिक कलह चरम पर है। पार्टी से समर्थित उम्मीदवार।सेराफिनुस कुल्लू मैदान में हैं, जबकि पूर्व अध्यक्ष पुष्पा कुल्लू को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पुष्पा ने निष्कासन को गलत बताते हुए कहा कि राज्य स्तर के नेता होने के नाते जिला स्तर से उन्हें निष्कासित नहीं किया जा सकता। यह मुद्दा अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
भाजपा ने भी बड़ा दांव खेला है। पूर्व अध्यक्ष फुलसुंदरी देवी के मैदान में उतरने के बाद पार्टी ने रामविलास बडाइक को टिकट दिया, लेकिन स्थानीय स्तर पर पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता फुलसुंदरी के साथ हैं। सूत्रों के अनुसार, यह रणनीति रामविलास को विधानसभा चुनाव से दूर रखने की हो सकती है। यदि फुलसुंदरी जीतती हैं, तो यह भाजपा के लिए “चित भी मेरी पट भी मेरी” वाली स्थिति बन जाएगी। वहीं, यदि रामविलास जीतते हैं, तो वे विधायक पद के प्रबल दावेदार बन सकते हैं, क्योंकि जिला एक दशक से भाजपा विधायक विहीन है।
झामुमो और निर्दलीय दावेदार भी मजबूत स्थिति में हैं। दो बार के वार्ड पार्षद अनिल तिर्की झामुमो से जनाधार बनाने में जुटे हैं, जबकि युवा नेता ओलिवर लकड़ा ने दलगत भावना से ऊपर उठकर सामाजिक संगठनों को साथ लेकर त्रिकोणीय समीकरण बनाया है।
वार्ड स्तर पर कुल 106 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जहां कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। उपाध्यक्ष पद (जो वार्ड सदस्यों द्वारा चुना जाएगा) के लिए दीपक अग्रवाल उर्फ रिंकू (वार्ड 12) खुलकर दावा ठोक रहे हैं। उनकी जुझारू छवि, मिलनसार स्वभाव और राजनीतिक समझ उन्हें चर्चा में रख रही है। वहीं, तीन बार के पार्षद कुलदीप किंडो साइलेंट लेकिन मजबूत दावेदार हैं, और रामजी यादव अपनी पत्नी को उपाध्यक्ष बनाने के मूड में हैं।
यह चुनाव चाणक्य नीति, धन-बल और फूट डालो-राज करो जैसे सिद्धांतों से भरा हुआ है। महिला मतदाताओं की संख्या अधिक होने से उनका रुख निर्णायक साबित हो सकता है। चुनावी माहौल रोमांचक और अनिश्चित है, जहां छोटी-छोटी बातें भी नतीजे बदल सकती हैं।


















