पत्नी के दो फॉलोअर्स कम होने पर थाने पहुंचा मामला, सोशल मीडिया बना घर में कलह की वजह

पत्नी के दो फॉलोअर्स कम होने पर थाने पहुंचा मामला, सोशल मीडिया बना घर में कलह की वजह

Share
Link copied

पत्नी के दो फॉलोअर्स कम होने पर थाने पहुंचा मामला, सोशल मीडिया बना घर में कलह की वजह

हापुड़/नोएडा: सोशल मीडिया के बढ़ते चलन ने जहां लोगों को जोड़ा, वहीं कुछ मामलों में यह पारिवारिक रिश्तों में दरार का कारण भी बन रहा है। ऐसा ही एक अनोखा मामला हापुड़ के महिला थाने में सामने आया, जहां एक पति-पत्नी के बीच सोशल मीडिया फॉलोअर्स को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि बात पुलिस तक पहुंच गई।
ग्रेटर नोएडा के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पिलखुवा निवासी पत्नी के खिलाफ महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। पति का आरोप था कि उनकी पत्नी हर समय सोशल मीडिया पर व्यस्त रहती है और प्रतिदिन दो रील्स बनाकर अपने अकाउंट पर पोस्ट करती है। इस कारण दोनों के बीच अक्सर तनाव रहता है। दूसरी ओर, पत्नी ने पलटवार करते हुए कहा कि पति के कहने पर उन्हें रसोई में बर्तन धोने पड़े, जिसके चलते उनके दो फॉलोअर्स कम हो गए।
चार घंटे की समझाइश के बाद सुलझा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए हापुड़ महिला थाना प्रभारी अरुणा राय ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया। करीब चार घंटे तक चली काउंसलिंग के बाद पति ने अपनी गलती स्वीकार की और मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया। थाना प्रभारी ने दोनों को आपसी समझ और संवाद के साथ रिश्ते को बेहतर बनाने की सलाह दी।
पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब इस दंपति के बीच सोशल मीडिया को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी दोनों के बीच रील्स और फॉलोअर्स को लेकर तकरार थाने तक पहुंच चुकी है। पति का कहना है कि सोशल मीडिया उनके घर के लिए सिरदर्द बन चुका है, जबकि पत्नी फॉलोअर्स बढ़ाने और रील्स बनाने के अपने शौक को छोड़ने को तैयार नहीं है।
सोशल मीडिया: वरदान या अभिशाप?
यह घटना सोशल मीडिया के दुरुपयोग और इसके पारिवारिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग न केवल व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि रिश्तों में भी सामंजस्य बनाए रखता है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या सोशल मीडिया वाकई में रिश्तों के लिए वरदान है या अभिशाप?
नोट: यह खबर वायरल सूचना के आधार पर तैयार की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस तरह के मामलों में संवेदनशीलता और समझदारी से काम लें।

ABOUT THE AUTHOR
drishtinow

drishtinow