Hormuz Crisis: शहीद कैप्टन राकेश रंजन का पार्थिव शरीर लाने की कोशिशें तेज, रक्षा राज्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय से साधा संपर्क

Hormuz Crisis: शहीद कैप्टन राकेश रंजन का पार्थिव शरीर लाने की कोशिशें तेज, रक्षा राज्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय से साधा संपर्क

Hormuz Crisis: शहीद कैप्टन राकेश रंजन का पार्थिव शरीर लाने की कोशिशें तेज, रक्षा राज्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय से साधा संपर्क

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Hormuz Crisis: शहीद कैप्टन राकेश रंजन का पार्थिव शरीर लाने की कोशिशें तेज, रक्षा राज्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय से साधा संपर्क

प्रेरणा सिंह

रांची/दुबई: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के अशांत समुद्री क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाज ‘अवाना’ के कैप्टन राकेश रंजन सिंह (47 वर्ष) के निधन के बाद अब उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। इस संवेदनशील मामले में रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) से संपर्क किया है, ताकि कागजी कार्रवाई जल्द पूरी कर शव को रांची लाया जा सके।
युद्ध के बीच फंसे जहाज पर आया हार्ट अटैक
जानकारी के अनुसार, कैप्टन राकेश रंजन सिंह का जहाज दुबई पोर्ट से तेल लोड कर भारत की ओर रवाना हुआ था। महज 60 किलोमीटर के सफर के बाद ही ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के कारण ‘होर्मुज की खाड़ी’ को बंद कर दिया गया, जिससे जहाज वहीं फंस गया। इसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच 18 मार्च को कैप्टन को अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा।
मदद मिलने में हुई देरी, दुबई में रखा है शव
बताया जा रहा है कि जहाज के चालक दल ने दुबई एटीसी से तुरंत एयर एंबुलेंस की मांग की थी, लेकिन युद्ध जैसी आपात स्थिति के कारण अनुमति नहीं मिल सकी। अंततः उन्हें बोट के जरिए दुबई पोर्ट ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। वर्तमान में उनका पार्थिव शरीर दुबई के पोर्ट शेख राशिद अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है।
बेटे की भावुक अपील: “पिता ही थे एकमात्र सहारा”
कैप्टन के बड़े बेटे प्रवर सिंह, जो बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्होंने रक्षा राज्यमंत्री को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है। प्रवर ने बताया कि उनके पिता ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, और अब परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द रांची (झारखंड) लाने की व्यवस्था।
अचानक आए इस संकट में परिवार के लिए उचित आर्थिक सहायता।
परिवार और पैतृक गांव में शोक की लहर
कैप्टन का पैतृक निवास बिहार के नालंदा (बिहारशरीफ) में है, जबकि वर्तमान में उनका परिवार रांची के अरगोड़ा स्थित वसुंधरा अपार्टमेंट में रहता है। घटना की जानकारी मिलते ही बिहार से परिजन रांची पहुंच गए हैं। पत्नी रंजू कुमारी और छोटे बेटे अधीश प्रताप का रो-रोकर बुरा हाल है।
सरकार की सक्रियता
रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ की पहल के बाद भारतीय दूतावास (दुबई) इस मामले को प्राथमिकता पर ले रहा है। उम्मीद है कि अगले 24 से 48 घंटों में कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी, जिससे कैप्टन का अंतिम संस्कार उनके गृहक्षेत्र में पूरे सम्मान के साथ किया जा सके।

यह समय परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि युद्ध क्षेत्रों में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।

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