भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव: BSF का पिलर लगाने का काम रुका..
डेस्क : पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 21 मई 2026 को भारी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) और भारतीय भूमि विभाग की टीम द्वारा सीमा पिलर लगाने के काम को रोक दिया गया है।
घटना का विवरण
घटना पटग्राम-लालमोनिरहाट सीमा के कोलसीरमुख (Kolsirmukh) क्षेत्र, कुचलीबाड़ी यूनियन में मुख्य सीमा पिलर संख्या 806 के पास हुई। BSF और भूमि विभाग की टीम सीमा चिह्नित करने और सुरक्षा फेंसिंग को मजबूत करने के लिए पिलर लगाने पहुंची थी।BGB के रंगपुर बटालियन (51 BGB) के जवानों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर काम पर रोक लगा दी। BGB का कहना है कि भारतीय टीम जीरो लाइन से मात्र 150 यार्ड (लगभग 137 मीटर) के अंदर काम कर रही थी, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा नियमों (1975 गाइडलाइंस) का उल्लंघन है। इस दायरे में कोई संरचना या पिलर लगाने की अनुमति नहीं है।BGB के Lt Col Naziyur Rahman ने मजबूत आपत्ति दर्ज की। BGB की सख्ती के कारण BSF की टीम को काम रोकना पड़ा और क्षेत्र से वापस लौटना पड़ा।
दोनों पक्षों की स्थिति
BGB का पक्ष: BGB ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि उनकी त्वरित कार्रवाई और विरोध के कारण भारतीय बलों को पीछे हटना पड़ा। BGB ने प्रेस रिलीज जारी कर पूरे मामले की जानकारी दी।
BSF का पक्ष: भारतीय अधिकारियों ने इस काम को सीमा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की नियमित प्रक्रिया बताया।
दोनों देशों के बीच फ्लैग मीटिंग (झंडा बैठक) बुलाई जा रही है, जिसमें मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल सीमा पर दोनों तरफ सतर्कता बढ़ा दी गई है, लेकिन कोई हिंसक घटना नहीं हुई।
भारत अपनी 4,096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग और सीमांकन का काम तेजी से पूरा कर रहा है। पश्चिम बंगाल में हाल ही में फेंसिंग कार्य में तेजी आई है। यह क्षेत्र टिन बिघा कॉरिडोर के पास संवेदनशील माना जाता है, जहां पहले भी enclave संबंधी विवाद हो चुके हैं।
ऐसी घटनाएं सीमा क्षेत्र में समय-समय पर होती रहती हैं और ज्यादातर डिप्लोमैटिक स्तर पर सुलझ जाती हैं।
अपडेट: 22-23 मई 2026 तक दोनों पक्षों के बीच तनाव शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रण में है।
















