सिमडेगा में नाबालिग ने ऑनलाइन गेम के लिए की डेढ़ लाख से अधिक की चोरी, पुलिस ने किया खुलासा

सिमडेगा में नाबालिग ने ऑनलाइन गेम के लिए की डेढ़ लाख से अधिक की चोरी, पुलिस ने किया खुलासा

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शंभू कुमार सिंह

सिमडेगा के केरसई थाना क्षेत्र में 25 अगस्त को हुई एक चोरी की घटना ने सभी को चौंका दिया था। अब पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि चोरी का यह कृत्य परिवार के ही एक नाबालिग लड़के ने ऑनलाइन गेमिंग के लिए किया था।

सिमडेगा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) एम अर्शी ने प्रेस वार्ता में बताया कि केरसई निवासी सचिन कुमार ने 25 अगस्त को अपने घर से 1,65,000 रुपये नकद और सोने के गहनों की चोरी की शिकायत दर्ज की थी। जांच में पाया गया कि घर या तिजोरी के ताले नहीं तोड़े गए थे, बल्कि चाबियों का उपयोग कर इन्हें खोला गया था। तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शिकायतकर्ता का एक नाबालिग परिवारजन बरसलोया निवासी मनीष कुमार साहू के संपर्क में था, जो ऑनलाइन जुआ और गेमिंग की सुविधा प्रदान करता था।

मनीष ने नाबालिग को ऑनलाइन जुआ खेलने के लिए एक गेमिंग आईडी दी थी, जिसमें नाबालिग ने जुलाई और अगस्त के बीच करीब 70,000 रुपये हार दिए। इसके बाद 24 अगस्त को नाबालिग ने मनीष को व्हाट्सएप के जरिए स्कैनर का उपयोग कर 80,000, 30,000 और 50,000 रुपये भेजे। मनीष ने इसके बदले एक और गेमिंग आईडी प्रदान की, जिसमें नाबालिग ने अतिरिक्त 15,000 रुपये हार दिए। इन पैसों को नाबालिग ने सचिन के घर की अलमारी से चुराया था।

पुलिस ने नाबालिग को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने चोरी और ऑनलाइन जुए में पैसे हारने की बात स्वीकार की। नाबालिग ने बताया कि उसने केवल नकद राशि चुराई थी, गहनों की चोरी नहीं की थी। पुलिस ने मनीष कुमार साहू को भी गिरफ्तार कर लिया, जो नाबालिग को गेमिंग आईडी प्रदान कर पैसे वसूल रहा था। इस मामले में डीएसपी हेड क्वार्टर रणवीर सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

सूत्रों के अनुसार, इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाई थी। हालांकि, पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर मामले का खुलासा कर दिया।

एसपी एम अर्शी ने ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते खतरे को देखते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों पर नजर रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल गेम्स और ऐसी गतिविधियों से दूर रखें, जो उन्हें गलत रास्ते पर ले जाएं। साथ ही, स्कूल संचालकों से बच्चों को किताबों के करीब लाने और मोबाइल से दूरी बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का आग्रह किया।

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