इज़राइल हमास शांति समझौता क्या स्थाई शांति बहाल कर पायेगी; समझौते में हैं कितना पेंच?

नवीन कुमार
दो वर्षों की लंबी लड़ाई … 67000 से अधिक मौतों के बाद आखिर इज़राइल और हमास के बीच शांति समझौता हो चुका है ।दोनों ही ओर जश्न का माहौल भी देखने को मिल रहा है। समझौते के अनुसार जल्द ही दोनों ही और से बंदी बनाकर रखे गए लोगों की घर वापसी भी होगी। समझौते में और कई प्रस्ताव भी शामिल हैं।लेकिन इन तमाम बिंदुओं के बीच सवाल एक बार फिर से वही है क्या यह समझौता स्थाई होगी? क्या क्षेत्र में शांति बहाल हो पायेगी?

इज़राइल की कैबिनेट ने राष्ट्रपति ट्रम्प के शांति प्रस्ताव के पहले चरण को मंजूरी प्रदान कर दी है। और इसके साथ ही लंबे समय से बंदी बनाकर रखे गए लोगों की घर वापसी शुरू हो जायेगी। शांति प्रस्ताव मूल रूप से बंधकों की रिहाई के अलावे मानवीय सहायता और क्षेत्रीय समृद्धि पर केंद्रित है। प्रस्ताव में चरणबद्ध तरीके से इज़राइली सेना की वापसी, गाज़ा का पुनर्निर्माण और फिलिस्तीनी राज्य की राह भी शामिल है।

समझौते की घोषणा के साथ ही विश्व के देशों ने इसे एक सकारात्मक पहल माना है। पुतिन हों या मोदी सभो ने एक स्वर से समझौते की सराहना की है। लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि क्या यह स्थाई होगी? अन्तरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसके स्थाई होने को लेकर आशंका जाहिर कर चुके हैं।

समझौते में ऐसे कई पेंच हैं जो इसके मार्ग में बाधक हो सकते हैं। समझौते के अनुसार इज़राइली सेना की आंशिक वापसी की बात कही गयी है । फिलिस्तीनी कॉरिडोर पर नियंत्रण भी इज़राइल का होगा। जबकि हमास इज़राइली सेना की पूर्ण वापसी चाहता है। योजना में हमास के हथियार सौंपने को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। पुनर्निर्माण प्रक्रिया में अरबों डॉलर की जरूरत होगी। समझौते को लेकर इज़राइल में आंतरिक विरोध भी है। जानकारों की मानें तो समझौता पूरी तरह से इज़राइल के पक्ष में जाता दिखाई देता है ।

जहां तक शांति योजना की बात है ट्रम्प के प्रयास की सराहना हो रही है। उनके इस प्रयास को भविष्य में उनके नोबेल शांति पुरस्कार की दिशा में एक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। लेकिन तमाम आशंकाओं के बीच समझौते के स्थाई होने को लेकर फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। यह अवश्य है कि इसे लंबी लड़ाई के बीच एक ब्रेकथ्रू अवश्य माना जा सकता है। लेकिन इसे स्थाई बनाये रखने के लिए आगे लगातार प्रयास और कूटनीति की जरूरत होगी। देखना है ट्रम्प इसमें कितना सफल हो पाते हैं।



















