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हैवानियत के 3 मामले और कहर, क्या आतंकवाद का कोई “शुभ अंक “होता है? मुंबई, अमेरिका और दिल्ली ब्लास्ट में छिपी भयावह समानता..

क्या आतंकवाद का कोई ” शुभ अंक ” होता है? यह सवाल आज फिर उठ रहा है, जब दिल्ली के चांदनी चौक के पास रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के निकट हुए विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। 10 नवंबर 2025 को शाम 6:55 बजे एक सफेद ह्युंडई I 20 कार में हुए इस धमाके ने 12 लोगों की जान ले ली और 25 से अधिक को घायल कर दिया। लेकिन यह घटना अकेली नहीं है। अमेरिका का 9/11, मुंबई का 26/11 और अब दिल्ली का 10/11 इन तीनों खौफनाक हमलों में एक डरावनी समानता है: नंबर 11

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चाहे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर विमानों का हमला हो, मुंबई के ताज होटल पर आतंकियों का कब्जा हो या दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर कार बम का धमाका सभी में 11 का साया मंडराता नजर आता है। सालों का फासला होने के बावजूद, क्या यह महज संयोग है या आतंकियों की रणनीति का हिस्सा? आइए, इन घटनाओं की पड़ताल करते हैं।

9/11: जब दहल उठा अमेरिका, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर खौफनाक हमला

11 सितंबर 2001 को अमेरिका का इतिहास हमेशा के लिए बदल गया। इसे दुनिया 9/11 अटैक के नाम से जानती है जहां 11 तारीख ने हजारों जिंदगियों को लील लिया। अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार कमर्शियल विमानों को हाईजैक कर लिया। दो विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों से टकरा दिया , जिससे दोनों इमारतें मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं। तीसरा विमान वाशिंगटन डीसी के पेंटागन पर गिरा, जबकि चौथा यात्रियों के विद्रोह की वजह से पेंसिल्वेनिया के एक खेत में क्रैश हो गया ।

इस हमले में 2,977 लोग मारे गए, जिसमें नागरिकों से लेकर आपातकालीन सेवाओं के जवान शामिल थे। आर्थिक नुकसान का अनुमान 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक लगाया गया। अमेरिका ने इसे ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया, जिसके बाद ‘वॉर ऑन टेरर’ की शुरुआत हुई। 11 की तारीख को चुना जाना महज संयोग था या प्रतीकात्मक? कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह नंबर आतंकियों के लिए ‘शुभ’ या ‘चुनौतीपूर्ण’ संदेश था।

26/11: मुंबई का काला अध्याय.., नवंबर की 11वीं तारीख का खूनी खेल

भारत को झकझोरने वाला हमला था 26 नवंबर 2008 का मुंबई अटैक, जिसे 26/11 कहा जाता है। यह भी 11 नंबर से जुड़ा हुआ था। लश्कर-ए-तैयबा के 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने समुद्री रास्ते से मुंबई में घुसपैठ की। निशाने पर थे ताज महल पैलेस होटल, ओबेरॉय ट्रिडेंट, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, लेपर्डे कैफे और नरीमन हाउस।

चार दिनों तक चले इस हमले में 166 लोग मारे गए, जिनमें 26 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड हमले किए। एनएसजी कमांडो ने अंततः हमलावरों को मार गिराया, लेकिन कसाब को जिंदा पकड़ा गया। यह हमला भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला था। फिर से, 11 का महीना क्या यह पैटर्न था?

10/11: दिल्ली का चांदनी चौक धमाका, 11वें महीने का नया कोहराम

और अब, 2025 का सबसे ताजा जख्म 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के रेड फोर्ट के पास कार विस्फोट। यह घटना 10/11 के रूप में दर्ज हो चुकी है, जहां 11 फिर से नवंबर महीने से जुड़ गया। चांदनी चौक की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर पीक आवर्स के दौरान एक धीमी गति से चल रही ह्युंडई I 20 कार में जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के दुकानों की कांच टूट गए,कई अन्य गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और सड़कें मलबे से पट गईं।

इस हमले में 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 घायल LNJP अस्पताल में भर्ती हैं। संदिग्ध डॉ. उमर नबी, पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा माना जा रहा है। कार पहले मयूर विहार और कनॉट प्लेस में देखी गई थी, फिर सुनहरी मस्जिद पार्किंग में खड़ी की गई। एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली है, और यूएपीए व एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।

क्या 11 है आतंक का ‘कहर नंबर’

इन तीनों घटनाओं में नंबर 11 की मौजूदगी चौंकाने वाली है। 9/11: 11 सितंबर (तारीख 11), 26/11 : 26 नवंबर (महीना 11) और 10/11: 10 नवंबर (महीना 11)। विशेषज्ञों का कहना है कि numerology या प्रतीकवाद आतंकियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में 11 को ‘नई शुरुआत’ या ‘चुनौती’ का प्रतीक बताया जाता है। लेकिन सवाल वही है संयोग या साजिश? दिल्ली पुलिस और एनआईए की जांच से और खुलासे हो सकते हैं।

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