पेसा कानून पर हेमंत सरकार की मंजूरी को लेकर भाजपा की आरती कुजूर ने साधा निशाना, कहा- निर्णय छुपाने की क्या मजबूरी?

पेसा कानून पर हेमंत सरकार की मंजूरी को लेकर भाजपा की आरती कुजूर ने साधा निशाना, कहा- निर्णय छुपाने की क्या मजबूरी?

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रांची : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश उपाध्यक्ष आरती कुजूर ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रवक्ताओं के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर पेसा कानून की कैबिनेट मंजूरी को सार्वजनिक न करने का आरोप लगाया है।

आरती कुजूर ने कहा कि पेसा एक्ट आदिवासी समाज का मौलिक अधिकार है, न कि कोई क्रिसमस गिफ्ट। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रिसमस से बहुत पहले से आदिवासी समाज का अस्तित्व रहा है और यह कानून उनके हक की रक्षा करता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि हेमंत सरकार ने कल (23 दिसंबर) कैबिनेट में पेसा कानून की नियमावली को मंजूरी दी है, तो फिर 24 घंटे बीत जाने के बाद भी इस निर्णय को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? निर्णय में ऐसी क्या बात है जिसे सरकार छुपाना चाहती है?

कुजूर ने आगे कहा कि मीडिया में छपी खबरों पर आदिवासी समाज और जनता कैसे विश्वास करे, जब मीडिया को भी कैबिनेट निर्णय से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

भाजपा नेता ने सरकार की कार्यशैली पर हमला बोलते हुए कहा कि 6 साल का कार्यकाल किसी सरकार के लिए कम नहीं होता। अब तक कोरोना का बहाना बनाकर काम टालते रहेंगे? सच्चाई यह है कि न्यायालय के सख्त आदेश और भाजपा के लगातार आंदोलन के दबाव में ही हेमंत सरकार को कैबिनेट में यह प्रस्ताव लाना पड़ा।

उन्होंने याद दिलाया कि आदिवासी समाज के हित में भाजपा ने कितने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, यह जनजातीय समाज अच्छी तरह जानता है। झामुमो ने भले ही छल-कपट से सत्ता हासिल कर ली हो, लेकिन आदिवासी समाज हेमंत सरकार से मिल रही पीड़ा और प्रताड़ना को नहीं भूलेगा।

आरती कुजूर ने अंत में मांग की कि कैबिनेट के इस निर्णय को तत्काल सार्वजनिक किया जाए और आधिकारिक रूप से सभी दस्तावेज जारी किए जाएं।

गौरतलब है कि 23 दिसंबर को हेमंत सोरेन कैबिनेट ने लंबे समय से लंबित पेसा नियमावली 2025 को मंजूरी दी थी, जिससे अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे। हालांकि, भाजपा का आरोप है कि सरकार इस फैसले को पूरी पारदर्शिता से सामने नहीं ला रही।

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