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ऐतिहासिक पल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली में गाया नेहोर प्रार्थना गीत, ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह में उपस्थित लोग हुए मंत्रमुग्ध :देखे वीडियो

ऐतिहासिक पल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली में गाया नेहोर प्रार्थना गीत, ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह में उपस्थित लोग हुए मंत्रमुग्ध

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जमशेदपुर, 29 दिसंबर 2025: देश के इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति ने संथाली भाषा में गीत गाया। झारखंड के जमशेदपुर स्थित करनडीह के दिशोम जाहेरथान परिसर में आयोजित ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समापन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक पारंपरिक संथाली नेहोर प्रार्थना गीत गाकर सभी को भावविभोर कर दिया।राष्ट्रपति ने लगभग तीन मिनट तक यह गीत गाया, जो उन्होंने बचपन में सीखा था। इस गीत में जाहेर आयो (प्रकृति माता) से समाज को सदैव सही और प्रकाश के मार्ग पर ले जाने की प्रार्थना की जाती है। जैसे ही राष्ट्रपति ने संथाली में गाना शुरू किया, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और जोहार के नारों से गूंज उठा। उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध होकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने ।

राष्ट्रपति द्रौपदी का गाना सुनने के लिए निचे लिंक में क्लिक करे।

https://www.facebook.com/share/v/14R7qdwu2S9/

राष्ट्रपति ने अपना पूरा संबोधन संथाली भाषा में ही दिया। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1925 में ओल चिकी लिपि का आविष्कार किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि यह लिपि संथाली समुदाय की सांस्कृतिक आत्मसम्मान और पहचान की आधारशिला है। उन्होंने संथाली लेखकों और समाजसेवियों की सराहना की, जो पंडित मुर्मू के अधूरे सपने को पूरा करने में लगे हैं।

राष्ट्रपति ने मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “हर भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी न भूलें।” उन्होंने संथाली भाषा के संरक्षण, आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा की अपील की। साथ ही, संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करने को संथाली समाज के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में संथाली भाषा और ओल चिकी के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले कई व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया।यह पल न केवल संथाली समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे देश के लिए आदिवासी भाषाओं और संस्कृति के सम्मान का प्रतीक बन गया। सोशल मीडिया पर इस गीत के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां लोग राष्ट्रपति की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं।

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