20251225 135413

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली भाषा (ओल चिकी लिपि) में भारतीय संविधान का किया लोकार्पण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली भाषा (ओल चिकी लिपि) में भारतीय संविधान का किया लोकार्पण

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Screenshot 20251225 140021

 

नई दिल्ली, 25 दिसंबर – राष्ट्रपति भवन में आज एक ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान का संताली भाषा में ओल चिकी लिपि में अनुवादित संस्करण का लोकार्पण किया। यह भारत की भाषाई विविधता और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।राष्ट्रपति मुर्मू ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “अलचिकि लिपि में लिखित संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित हुआ है। संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संताली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। ओड़िशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संताली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे तथा संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे।”

Screenshot 20251225 135000

यह पहली बार है जब भारतीय संविधान का आधिकारिक स्तर पर संताली भाषा की मूल ओल चिकी लिपि में प्रकाशन हुआ है। संताली भाषा को 2003 में 92वें संवैधानिक संशोधन द्वारा आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, लेकिन अब इस अनुवाद से लाखों संताली भाषी नागरिक अपनी मातृभाषा में मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों और संवैधानिक प्रावधानों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।ओल चिकी लिपि का आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में किया था, जो संताली समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मू स्वयं संताली समुदाय से आती हैं और उन्होंने हमेशा आदिवासी भाषाओं के संरक्षण व प्रचार पर जोर दिया है।

यह पहल भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और समावेशी विकास को मजबूत करती है। संताली भाषी समुदाय ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है और इसे अपनी भाषा के लिए गौरव का क्षण बताया है।

Share via
Send this to a friend