रांची में पुलिस की लापरवाही फिर उजागर: चूहों ने नष्ट किया जब्त डोडा, दो आरोपी बरी
रांची में पुलिस की लापरवाही फिर उजागर: चूहों ने नष्ट किया जब्त डोडा, दो आरोपी बरी
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रांची, : राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में एक बार फिर पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वर्ष 2019 में जब्त किए गए बड़े पैमाने पर डोडा चूर्ण को चूहों ने नष्ट कर दिया, जिसके चलते सबूतों की कमी और पुलिस गवाहों के बयानों में विरोधाभास के कारण अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया।
यह मामला 31 मई 2019 का है, जब नामकुम पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कोलाड गांव के पास डोडा की तस्करी हो रही है। छापेमारी में कार्तिक महतो और चुरू लोहरा नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके वाहनों से 45 बोरी डोडा (कुल लगभग 675 से 836 किलोग्राम) जब्त करने का दावा किया। साथ ही एक बोलेरो पिकअप और दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं। इस संबंध में NDPS एक्ट की धारा 15सी और 29 के तहत नामकुम थाना में केस नंबर 161/2019 दर्ज किया गया।अदालत में पुलिस ने दावा किया कि जब्त डोडा को खुले आसमान के नीचे रखा गया था, जिससे बोरे खराब हो गए।
वहीं, FSL सैंपल वाली प्लास्टिक बॉक्स को चूहों ने कुतर दिया, जिसमें से चार बॉक्स प्रभावित हुए। हालांकि, एसएफएसएल रिपोर्ट में डोडा की पुष्टि हुई थी।
जांच अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने चार्जशीट दाखिल की और अभियोजन पक्ष ने सात पुलिस गवाह पेश किए। लेकिन गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए।आरोपियों के बरी होने के प्रमुख कारण:जब्त बोरे न तो सील किए गए और न ही चिह्नित।
गवाहों के बयानों में वजन को लेकर असंगति:
कुछ ने प्रति बोरी 15 किलो बताया, तो IO ने कुल 836 किलो और एक गवाह ने 200 किलो कहा।
गिरफ्तारी और जब्ती का समय अलग-अलग: जब्ती सूची सुबह 4 बजे की, लेकिन गिरफ्तारी मेमो सुबह 8:30 बजे का।
NDPS धारा 42 का पालन नहीं: गुप्त सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित रूप में नहीं भेजी गई।
कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मौजूद।
16 अक्टूबर 2025 को विशेष NDPS अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य संदेहास्पद हैं और बुनियादी तथ्य सिद्ध नहीं होते, इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है।
हाल ही में ओरमांझी थाने में 200 किलो गांजा चूहों द्वारा नष्ट होने का दावा कर आरोपी को बरी किए जाने के बाद यह दूसरा ऐसा मामला है, जो पुलिस की सबूत संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

















