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श्री रामरेखा धाम में माघ पूर्णिमा मेला का भव्य समापन: महंत अखंड दास जी महाराज ने दिया सनातन एकता का संदेश

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा : झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री रामरेखा धाम में आयोजित तीन दिवसीय माघ पूर्णिमा मेले का भव्य और श्रद्धापूर्ण समापन हुआ। मेले के अंतिम दिन हवन-पूजन, विद्यार्जन, सत्संग और विशाल भंडारे के साथ भक्तों में उल्लास का माहौल रहा।

प्रातःकाल से ही रामरेखा धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने स्नान-ध्यान कर भगवान श्री राम के दर्शन किए, संत-महात्माओं से आशीर्वाद प्राप्त किया और सत्संग में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया। 24 घंटे तक चले अखंड हरिकीर्तन और नाम-जप का विधिवत समापन हुआ, जिसके बाद पारंपरिक दधी भंजन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने रंग-अबीर लगाकर, फाग गीत गाते हुए और नृत्य करते हुए फागुन ऋतु का हर्षोल्लास से स्वागत किया।

मेले के दौरान नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने स्थानीय लोक संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की, जिससे धार्मिक श्रद्धा के साथ सांस्कृतिक जागरूकता भी मजबूत हुई। रामरेखा धाम, जो त्रेतायुग में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के चरणों से पावन हुआ है, सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां भगवान राम के जीवन दर्शन—सत्य, मर्यादा, त्याग, सेवा और कर्तव्य—का सजीव अनुभव होता है। यह स्थल मात्र धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों और रामराज्य की भावना से जोड़ने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।

सत्संग भवन में धाम पदाधिकारियों द्वारा सभी संतों का माल्यार्पण और आरती के साथ स्वागत किया गया। रामरेखा धाम विकास समिति के अध्यक्ष एवं महंत श्री राम अखंड दास जी महाराज ने अपने प्रमुख संदेश में कहा, “रामरेखा धाम सनातन संस्कृति की आत्मा है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन समाज को संस्कारवान बनाने का कार्य करते हैं। आज की आवश्यकता है कि सभी समाज एकजुट होकर सनातन धर्म को मजबूत करें और भगवान श्री राम के आदर्शों को जीवन में उतारें। आपसी भाईचारा, सेवा भाव और धर्म के मार्ग पर चलकर ही राष्ट्र एवं समाज का कल्याण संभव है।” उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से धर्म, संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने कहा कि रामरेखा धाम जैसे पवित्र स्थल सनातन चेतना के केंद्र हैं, जो समाज को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अंत में रामरेखा धाम विकास समिति ने मेले को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, सेवकों और श्रद्धालुओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सनातन एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने का माध्यम भी साबित हुआ।

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