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चुनाव आयोग (eci) की TMC को सीधी चेतावनी: ‘बंगाल चुनाव में नहीं चलेगी हिंसा और बूथ जामिंग

चुनाव आयोग (eci) की TMC को सीधी चेतावनी: ‘बंगाल चुनाव में नहीं चलेगी हिंसा और बूथ जामिंग

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नई दिल्ली | 8 अप्रैल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक दो सप्ताह पहले, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच तनाव अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। आज दिल्ली में चुनाव आयोग और टीएमसी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई एक संक्षिप्त और बेहद तीखी बैठक के बाद आयोग ने सीधे सोशल मीडिया पर पार्टी को निशाने पर लिया।

ECI का अभूतपूर्व कदम: सीधे पार्टी को किया टैग

निर्वाचन सदन में हुई बैठक के कुछ ही समय बाद, चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल पर तृणमूल कांग्रेस  को सीधे संबोधित करते हुए एक ‘अल्टीमेटम’ पोस्ट किया।

आयोग ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा:

चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक: पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।

यह संभवतः पहला ऐसा मामला है जब संवैधानिक संस्था ने किसी एक विशेष राजनीतिक दल को टैग करके इस तरह की सख्त चेतावनी सार्वजनिक की है।

7 मिनट का हाई-वोल्टेज ड्रामा: ‘Get Lost’ का आरोप

इससे पहले, TMC के वरिष्ठ नेताओं—देरेक ओ’ब्रायन, साकेत गोखले, मेनका गुरुस्वामी और सागरिका घोष का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने पहुँचा था। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात मात्र 7 मिनट चली और बेहद कड़वाहट के साथ समाप्त हुई।

TMC का आरोप: बैठक के बाद बाहर आए नेताओं ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने उनकी शिकायतें सुनने के बजाय उन्हें अपमानित किया और Get Lost  (निकल जाओ) तक कह दिया।

ECI के सूत्रों का जवाब:

दूसरी ओर, आयोग की तरफ से संकेत दिए गए कि टीएमसी सांसद देरेक ओ’ब्रायन ने बैठक के दौरान मर्यादा का उल्लंघन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त पर चिल्लाने लगे, जिसके कारण बैठक तुरंत समाप्त कर दी गई।
मुख्य विवाद: वोटर लिस्ट और निष्पक्षता 

टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जानबूझकर भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। विवाद का मुख्य केंद्र **’स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR)** है, जिसके तहत लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। साकेत गोखले ने कहा कि यह विपक्षी दल को टारगेट करने की साजिश है। पार्टी ने अब मांग की है कि आयोग बैठक का पूरा ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक करे।

23 अप्रैल को पहला मतदान

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं:
1. पहला चरण:23 अप्रैल 2026
2. दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026
3. मतगणना: 4 मई 2026

चुनाव आयोग का यह आक्रामक रुख साफ करता है कि इस बार बंगाल में चुनावी हिंसा और धांधली को रोकने के लिए आयोग बेहद सख्त रणनीति अपना रहा है। राज्य में राजनीतिक पारा अब अपने चरम पर है।

मुख्य बातें एक नजर में:
सख्त संदेश:ECI ने पोस्ट में ‘बूथ जामिंग’ और ‘सोर्स जामिंग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:TMC ने इसे एकतरफा और पक्षपाती व्यवहार बताया।
सुरक्षा:बंगाल में पुरानी चुनावी हिंसा के इतिहास को देखते हुए आयोग इस बार अधिक सतर्क है।

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