CBSE 10th Result: मिलिए झारखंड की ‘प्रण्या’ से, जिन्होंने बिना कोचिंग के दबाव के हासिल किए 99.6% अंक; डॉक्टर बनने का है सपना
CBSE 10th Result: मिलिए झारखंड की ‘प्रण्या’ से, जिन्होंने बिना कोचिंग के दबाव के हासिल किए 99.6% अंक; डॉक्टर बनने का है सपना
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रांची: जब इरादे फौलादी हों और अनुशासन जीवन का हिस्सा, तो सफलता कदम चूमती ही है। सीबीएसई 10वीं की परीक्षा में रांची की प्रण्या प्रिया ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। 99.6% अंकों के साथ स्टेट टॉपर की श्रेणी में जगह बनाकर प्रण्या ने साबित कर दिया कि ‘स्मार्ट वर्क’ और ‘सेल्फ कंट्रोल’ ही कामयाबी की असली चाबी है।
DPS रांची का गौरव: 100% रिजल्ट के बीच चमका प्रण्या का नाम
राजधानी के प्रतिष्ठित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) के लिए यह दोहरा उत्सव है। एक तरफ जहाँ स्कूल का कुल परिणाम शत-प्रतिशत रहा, वहीं प्रण्या प्रिया ने स्कूल और राज्य, दोनों का नाम रोशन किया है। स्कूल प्रबंधन ने इस सफलता को संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता की जीत बताया है।
डिजिटल दौर में ‘डिजिटल अनुशासन’ की मिसाल
आज के दौर में जहाँ मोबाइल को पढ़ाई का दुश्मन माना जाता है, प्रण्या ने इसे अपना साथी बनाया। प्रण्या बताती हैं:
“मम्मी-पापा ने मुझे मोबाइल दिया था, लेकिन मैंने तय किया था कि इसका इस्तेमाल केवल ‘कंटेंट’ समझने और मन शांत करने के लिए गाने सुनने में ही करूँगी। मोबाइल का सदुपयोग आपकी ताकत बन सकता है।”
सफलता का ‘प्योर’ फॉर्मूला: नो प्रेशर, ओनली कॉन्सेप्ट
प्रण्या की सफलता के पीछे कोई सीक्रेट नहीं, बल्कि एक स्पष्ट नजरिया है:
नियमितता: हर दिन की पढ़ाई को बोझ नहीं बनने दिया।
समझ: रटने के बजाय कॉन्सेप्ट को समझने पर जोर दिया।
शून्य दबाव: कभी भी टॉपर बनने के प्रेशर में पढ़ाई नहीं की।
विरासत में मिली शिक्षा की लौ
प्रण्या एक ऐसे परिवार से आती हैं जहाँ शिक्षा ही प्राथमिकता है। उनके पिता डॉ. मनोज कुमार प्रसाद (रिम्स, मेडिसिन विभाग) एक जाने-माने चिकित्सक हैं, और माता दीप्ति लता उच्च शिक्षा (PhD) में व्यस्त हैं। दादा-दादी की आँखों में अपनी पोती के लिए गर्व के आँसू हैं। प्रण्या भी अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।
जूनियर्स के लिए प्रण्या के 3 टिप्स:
1. पढ़ाई को कभी बोझ न समझें, उसे एन्जॉय करें।
2. गैजेट्स (मोबाइल/टैब) का इस्तेमाल केवल सीखने के लिए करें, भटकने के लिए नहीं।
3. अपने माता-पिता के भरोसे को कभी टूटने न दें।
















