Nagarmal Bajoria, the perennial election contestant known as ‘Dharti Pakad’, has passed away; his last rites will be performed on the banks of the Ganges in Bhagalpur.

280 चुनाव लड़ने वाले ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया का निधन, भागलपुर में गंगा किनारे होगा अंतिम संस्कार

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Nagarmal Bajoria, the perennial election contestant known as ‘Dharti Pakad’, has passed away; his last rites will be performed on the banks of the Ganges in Bhagalpur.
Nagarmal Bajoria, the perennial election contestant known as ‘Dharti Pakad’, has passed away; his last rites will be performed on the banks of the Ganges in Bhagalpur.

भागलपुर: बिहार के भागलपुर के चर्चित कारोबारी और अपने अनोखे चुनावी सफर के लिए देशभर में पहचान बनाने वाले नागरमल बाजोरिया का निधन हो गया। ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर बाजोरिया ने अपने जीवन में नगर निकाय चुनाव से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक करीब 280 चुनावों में किस्मत आजमाई। उनके निधन की खबर से भागलपुर में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार भागलपुर के बरारी श्मशान घाट पर गंगा नदी के किनारे किया जाएगा।

लाहौर में जन्म, बंटवारे के बाद भागलपुर बना कर्मभूमि

नागरमल बाजोरिया का जन्म वर्ष 1930 में लाहौर में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और बिहार के भागलपुर को अपना स्थायी ठिकाना बनाया। परिवार ने शहर के एमपी द्विवेदी रोड के पास अपना घर बनाया। कारोबारी परिवार से आने वाले बाजोरिया आगे चलकर व्यापार के साथ-साथ चुनावी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे। बाजोरिया ने जिंदगी के करीब सात दशक चुनावी मैदान में अलग-अलग रूपों में सक्रिय रहते हुए गुजारे। खास बात यह रही कि उनके लिए चुनाव सिर्फ जीत-हार का माध्यम नहीं था, बल्कि लोगों के बीच लोकतंत्र और मतदान के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने का जरिया भी था।

30 साल की उम्र में जीता नगरपालिका चुनाव

परिवार के मुताबिक, नागरमल बाजोरिया ने करीब 30 वर्ष की उम्र में भागलपुर नगरपालिका का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद चुनाव लड़ना उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया। उन्होंने स्थानीय निकाय से लेकर विधानसभा, लोकसभा और राष्ट्रपति चुनाव तक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। साल 1969 में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार वीवी गिरि के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव में नामांकन दाखिल कर देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। उनका अंतिम चुनाव वर्ष 2019 में बताया जाता है।

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इंदिरा गांधी से राजीव गांधी तक को दी चुनावी चुनौती

नागरमल बाजोरिया ने अपने लंबे चुनावी सफर में देश के कई बड़े नेताओं के खिलाफ भी चुनाव लड़ा। उन्होंने रायबरेली में इंदिरा गांधी और अमेठी में राजीव गांधी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर सुर्खियां बटोरीं। इसके अलावा संजय गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और प्रणब मुखर्जी जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ भी उन्होंने चुनाव लड़ा। उनकी चुनावी शैली भी आम उम्मीदवारों से बिल्कुल अलग रही। चुनावी मैदान में उतरते ही उनका पहनावा, हाथ में रहने वाली घड़ी और प्रचार का अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता था।

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कपड़ों पर स्लोगन और गधों के साथ प्रचार ने खींचा ध्यान

वर्ष 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नागरमल बाजोरिया का प्रचार अभियान खासा चर्चित रहा। उनके कपड़ों पर लिखे संदेश और स्लोगन लोगों का ध्यान आकर्षित करते थे। चुनाव प्रचार के दौरान गधों के गले में भ्रष्टाचार से जुड़े संदेश लटकाकर निकाली गई उनकी रैलियां भी चर्चा में रहीं। वह अक्सर अपने साथ हाथ में घड़ी-घंट लेकर चलते थे। इसके जरिए वह लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था, मतदान और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने की कोशिश करते थे। उनकी पहचान में महात्मा गांधी के दौर की शैली वाली घड़ी भी खास मानी जाती थी।

‘जीतने के लिए नहीं, लोगों को जगाने के लिए लड़ते थे चुनाव’

नागरमल बाजोरिया के पोते सौरव बाजोरिया के मुताबिक, उनके दादा की चुनावी यात्रा को केवल हार और जीत के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। उनका मानना था कि लोकतंत्र में आम आदमी को भी सत्ता के सबसे बड़े चुनाव में खड़े होने का अधिकार है। परिवार के अनुसार, बाजोरिया चुनावों को लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का माध्यम मानते थे। यही वजह थी कि लगातार हार के बावजूद उन्होंने चुनाव लड़ना नहीं छोड़ा।

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सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे

चुनावी गतिविधियों के अलावा नागरमल बाजोरिया सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में उन्होंने आर्थिक मदद की। कई स्थानों पर अपने खर्च से हैंडपंप लगवाकर लोगों की पेयजल संबंधी परेशानी दूर करने का प्रयास किया। इस तरह उनका व्यक्तित्व सिर्फ एक ‘चुनावी योद्धा’ तक सीमित नहीं था। व्यापार, चुनाव और सामाजिक सरोकार—तीनों क्षेत्रों में उनकी अलग पहचान बनी।

पटना में अंतिम सांस लेने वाले नागरमल बाजोरिया के निधन के बाद भागलपुर में उनके चाहने वालों और परिचितों के बीच शोक का माहौल है। गंगा किनारे बरारी श्मशान घाट पर होने वाला उनका अंतिम संस्कार उनके लंबे और असाधारण सार्वजनिक जीवन का अंतिम पड़ाव होगा।अगर चाहें तो मैं इसी खबर के लिए 3-4 दमदार वेबसाइट हेडलाइन और एक SEO-friendly मेटा डिस्क्रिप्शन भी बना दूंगा।

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